बर्लिन सम्मेलन में सूडान के लिए 1.5 अरब यूरो जुटे, पर शांति की राह अब भी धुंधली
तीन साल के गृहयुद्ध से तबाह सूडान के लिए अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने भारी राशि जुटाई, लेकिन युद्धरत पक्षों की अनुपस्थिति ने शांति वार्ता की संभावनाओं को धूमिल कर दिया।

सूडान के विनाशकारी गृहयुद्ध की तीसरी वर्षगांठ पर बर्लिन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दानदाताओं ने लगभग 1.5 अरब यूरो (करीब 1.1 अरब पाउंड) की मानवीय सहायता का संकल्प जताया। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ की मेजबानी वाली इस बैठक में 55 देशों ने हिस्सा लिया और घोषित राशि पिछली प्रतिज्ञाओं को पीछे छोड़ गई। जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफूल ने वैश्विक मानवीय बजट में कटौती के माहौल में इसे एक 'सकारात्मक संकेत' बताया, वहीं यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों ने कुल धनराशि का आधा (750 मिलियन यूरो) देने का वादा किया।
तीन साल पहले सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच छिड़ी यह लड़ाई अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, जिसने सूडान को 'विश्व की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी' (संयुक्त राष्ट्र के अनुसार) में ढकेल दिया है। एक करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, दो करोड़ से ज्यादा तीव्र भुखमरी से जूझ रहे हैं और लाखों लोग मारे जा चुके हैं। ओमदुरमान के निवासी 42 वर्षीय अमगद अहमद का दर्द बयान करता हैः 'हम थक चुके हैं. हमने नौकरी, बचत और स्थायित्व की हर भावना खो दी है।' फिर भी, बर्लिन सम्मेलन से पहले तक सूडान के लिए जरूरी मानवीय धन का मात्र 16 प्रतिशत ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जुट पाया था।
राशि जुटाने में यह सफलता जरूर मिली, मगर शांति की संभावना अब भी क्षीण है। सम्मेलन में सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) - दोनों युद्धरत पक्षों - को आमंत्रित ही नहीं किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि इससे संघर्षविराम या सार्थक शांति कदमों की संभावना लगभग समाप्त है। अब तक की सभी शांति पहलें नाकाम रही हैं और दोनों जनरलों की स्थितियाँ बीच-बीच में और सख्त हुई हैं, जिन पर गंभीर युद्ध अपराधों के आरोप हैं।
विभिन्न भू-राजनीतिक खेमों से आए संकल्पों में ब्रिटेन ने अपनी फ्रंटलाइन सहायता दोगुनी कर 1.5 करोड़ पाउंड कर दी, कनाडा ने 12 करोड़ कनाडाई डॉलर के मानवीय-विकास पैकेज की घोषणा की और जर्मनी ने अकेले 23 करोड़ यूरो से अधिक देने का वादा किया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरस ने वीडियो संदेश में इस 'दुःस्वप्न' को समाप्त करने की पुकार लगाई, जबकि आयोजकों द्वारा रखा गया एक अरब डॉलर का लक्ष्य पार कर लिया गया।
फिर भी, धन की यह बाढ़ दीर्घकालिक समाधान का विकल्प नहीं है। युद्ध भूख और विस्थापन को रोज़ गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर ईरान सहित अन्य संकट हावी हैं, जिससे सूडान उपेक्षित रहा है। बर्लिन में जुटी राशि लाखों जिंदगियाँ बचा सकती है, लेकिन बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के यह संकट के लक्षणों को ही छू पाएगी, जड़ों को नहीं। असली चुनौती आर्थिक प्रतिबद्धताओं को स्थायी कूटनीतिक दबाव में बदलने की है।
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