होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान की खुली धमकी के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट
लेबनान में संघर्षविराम के बीच ईरान ने होर्मुज खोलने की घोषणा की, लेकिन अमेरिकी रुख सख्त; तेहरान ने लाल सागर जैसे अन्य जलमार्ग बंद करने की चेतावनी दी

ईरान ने एक साथ राहत और आशंका का माहौल पैदा करते हुए कहा कि लेबनान में जारी संघर्षविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य ‘पूरी तरह खुला’ रहेगा। विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की, जबकि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने पर यह रास्ता बंद हो सकता है। [A7] यह घोषणा ऐसे समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध हटाने से इनकार करते हुए कहा कि ‘कोई समझौता होने तक नाकेबंदी बनी रहेगी’। [A5] तेहरान का यह कदम दरअसल पहले की उस धमकी का ही विस्तार है जिसमें उसने कहा था कि अगर अमेरिकी दबाव बढ़ा तो वह फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही रोक देगा। [A1]
इस भू-राजनीतिक खींचतान का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाज़ार पर दिखा। ईरान द्वारा जलडमरूमध्य खोले जाने की ख़बर आते ही कच्चे तेल की कीमतें 10 प्रतिशत तक गिर गईं, जो इस जलमार्ग की अहमियत को रेखांकित करता है—दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम इसी रास्ते से गुज़रता है। [A3, A4] लेकिन बाज़ार की राहत क्षणिक हो सकती है, क्योंकि ईरान ने साफ कहा है कि यह खुलापन केवल अस्थायी संघर्षविराम की अवधि तक सीमित है, जो अगले बुधवार को समाप्त हो रहा है और जिसके विस्तार पर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। [A5] ट्रंप के तेवरों से स्पष्ट है कि अमेरिका बिना किसी व्यापक शांति समझौते के पीछे नहीं हटेगा, जिससे बातचीत का दूसरा दौर विफल होने पर संकट गहरा सकता है।
बहुपक्षीय प्रतिक्रियाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ब्रिटेन और फ्रांस ने ट्रंप के नेतृत्व वाली नाकेबंदी में शामिल होने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, एक यूरोपीय राजनयिक के हवाले से कहा गया कि ‘हम युद्ध में नहीं घिसटना चाहते’। [A4] इसके विपरीत, ईरान ने अपनी धमकी का दायरा बढ़ाते हुए लाल सागर के बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी बंद करने की बात कही है, जिस पर अरब देशों का तेल निर्यात निर्भर है। [A10] यदि ऐसा हुआ तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए यह दोहरा झटका होगा, क्योंकि होर्मुज और बाब अल-मंदब दोनों ही प्रमुख ऊर्जा गलियारे हैं।
तेहरान की रणनीति एक सधी हुई कूटनीतिक चाल नज़र आती है: वह एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत दे रहा है कि वह तनाव घटाने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका को यह अहसास करा रहा है कि उसके पास पूरे क्षेत्रीय समुद्री व्यापार को ठप करने की क्षमता है। अमेरिकी पक्ष भी युद्ध को ‘समाप्ति के करीब’ बता रहा है, लेकिन चीन से ईरान को हथियार न देने की अपील जैसे कूटनीतिक दबाव जारी हैं। [A8] विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्षविराम की अवधि के भीतर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई, तो दोनों पक्षों के बीच संकेतों का यह खेल खुले टकराव में बदल सकता है, जिसकी कीमत केवल तेल की बढ़ती कीमतों से कहीं अधिक होगी।
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