तुर्की और सऊदी अरब ने ऐतिहासिक हेजाज़ रेलवे को पुनर्जीवित करने की ओर कदम बढ़ाया
दोनों देशों के बीच रेलवे और लॉजिस्टिक्स समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर; खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाले भूमि गलियारे की संभावना, साथ ही दम्मम में नई परियोजना।

सऊदी अरब और तुर्की के परिवहन मंत्रियों ने रियाद में रेलवे एवं लॉजिस्टिक सेवाओं में सहयोग के दो प्रमुख समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर मध्य पूर्व के भू-परिवहन मानचित्र को नई दिशा दे दी है। इन समझौतों की सबसे चर्चित बात एक सदी से भी पुराने हेजाज़ रेलवे के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार की योजना है, जो कभी इस्तांबुल से मदीना तक फैला था। तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोग्लू ने इसे सहयोग के नए चरण की शुरुआत बताते हुए कहा कि दोनों देश तकनीकी विशेषज्ञता, लॉजिस्टिक केंद्रों और क्षेत्रीय संपर्क को मज़बूत करेंगे। [A2][A3]
तुर्की की नज़र में यह परियोजना खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ने वाले एक व्यापक भूमि गलियारे का अहम हिस्सा है। उरालोग्लू ने स्पष्ट किया कि इराक से होते हुए सऊदी अरब तक जाने वाले दो परीक्षण मार्ग इस रास्ते की व्यवहार्यता साबित कर चुके हैं। उन्होंने सीरिया-जॉर्डन-इराक मार्ग पर हो रहे घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखने की बात कही, जिससे संकेत मिलता है कि अंकारा बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच एक से अधिक वैकल्पिक गलियारों पर काम करना चाहता है। 2012 से पहले वार्षिक द्विपक्षीय परिवहन 20,000 यात्रियों तक पहुंच चुका था, और अब दोनों देश उस स्तर को पार करने का लक्ष्य रखते हैं। [A3][A4]
वहीं सऊदी अरब अपनी घरेलू रेल महत्त्वाकांक्षाओं में भी कोई कमी नहीं रख रहा है। स्पेन की ओएचएल ग्रुप की सऊदी शाखा और मिस्र की हसन अल्लाम कंस्ट्रक्शन के संयुक्त उपक्रम को सऊदी अरब रेलवे (एसएआर) ने पूर्वी प्रांत में दम्मम द्वितीय औद्योगिक शहर रेलवे कनेक्शन परियोजना का ठेका दिया है। 22.7 किलोमीटर लंबी यह एकल-पटरी परियोजना राजमार्ग HW615 पर 265 मीटर और अरामको पाइपलाइन कॉरिडोर पर 118 मीटर के पुल, सिग्नलिंग-दूरसंचार प्रणाली और बिजली उपयोगिता कार्यों को शामिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और क्षेत्रीय इंजीनियरिंग क्षमता का मिलाजुला चेहरा पेश करती है। [A1]
क्षेत्रीय पर्यवेक्षक इस पूरे घटनाक्रम को केवल द्विपक्षीय समझौतों से आगे की चीज़ मान रहे हैं। हेजाज़ रेलवे का पुनर्जन्म एक ऐसा ढांचागत प्रकल्प है जो अरब प्रायद्वीप और अनातोलिया के बीच एक सदी पुराने संबंध को नए भू-आर्थिक यथार्थ में ढाल सकता है। जहाँ एक ओर तुर्की यूरोपीय संघ और मध्य पूर्व के बीच लॉजिस्टिक पुल बनने की अपनी पुरानी महत्त्वाकांक्षा को नई गति दे रहा है, वहीं सऊदी अरब विज़न 2030 के तहत खुद को वैश्विक लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने की कोशिशों में जुटा है। सीरिया और इराक जैसे देशों की आंतरिक स्थितियाँ अभी भी अनिश्चित हैं, लेकिन इस गलियारे का विचार मध्य पूर्व को एशिया-यूरोप व्यापार प्रवाह में एक केंद्रीय कड़ी के रूप में खड़ा करने की ठोस संभावना दिखाता है। [A5][A4]
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
तुर्की और सऊदी अरब के बीच दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर को क्षेत्रीय पहल के रूप में दर्शाया गया है, जो ऐतिहासिक हेजाज़ रेलवे को पुनर्जीवित करने और एशिया व यूरोप के बीच परिवहन मानचित्रों को नया आकार देने का काम करेगा। समझौतों को एक सीमा-पार संरचनात्मक परियोजना के रूप में देखा जा रहा है, जो स्थानीय हितों से ऊपर उठकर व्यापार और आवाजाही में सच्चे क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देगी। रेल प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स केंद्रों और डिजिटलीकरण में सहयोग पर जोर दिया गया है ताकि क्षेत्रीय उथल-पुथल के बीच निर्बाध व्यापार प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
सऊदी अरब और तुर्की ने रेलवे और लॉजिस्टिक्स पर दो बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिन्हें भविष्य में खाड़ी को सीधे यूरोप से जोड़ने वाले भूमि परिवहन गलियारे की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सराहा गया। समझौतों को एक रणनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो तकनीकी दक्षता, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे और निर्बाध संपर्क को आगे बढ़ाएगा, और रियाद की वैश्विक लॉजिस्टिक्स केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है। इस व्यावहारिक कदम को राज्य के आर्थिक विविधीकरण और व्यापार गलियारों के विस्तार के रूप में सराहा जा रहा है।
तुर्की और सऊदी अरब के बीच रेलवे और लॉजिस्टिक्स समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर की रिपोर्टिंग में ईरानी सूत्र सतर्क लहज़ा अपनाते हैं, इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि क्षेत्रीय उथल-पुथल के कारण द्विपक्षीय यात्री आवागमन 2012 से पहले के 20,000 वार्षिक आंकड़े से काफी नीचे बना हुआ है। अधिकारी उस स्तर को पार करने का लक्ष्य बताते हैं, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि तेहरान सीरिया-जॉर्डन-इराक धुरी के विकास पर बारीकी से नज़र रख रहा है, जो यह संकेत देता है कि नया गलियारा ईरानी क्षेत्र को दरकिनार कर सकता है। कवरेज में व्यावहारिक अवलोकन के साथ क्षेत्रीय संपर्क में बदलाव को लेकर संदेह का अंतर्निहित स्वर शामिल है।
तुर्की और सऊदी अरब सदियों पुरानी हेजाज़ रेलवे के पुनरुद्धार की योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं, और रेल संपर्क तथा लॉजिस्टिक्स पर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल को अंकारा के नेतृत्व में एक ऐसे ऐतिहासिक गलियारे को पुनर्जीवित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है जो कभी सीरिया और जॉर्डन के रास्ते खाड़ी को यूरोप से जोड़ता था, और अब इसे काफी भू-राजनीतिक अहमियत वाली परियोजना माना जा रहा है। प्रेक्षकों का कहना है कि इस मार्ग का आधुनिकीकरण क्षेत्रीय व्यापार प्रवाह को पुनः आकार दे सकता है और पहले से अस्थिर सीरियाई परिदृश्य में एक संवेदनशील पहलू जोड़ सकता है।
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