सऊदी अर्थव्यवस्था ने छुआ 1.31 ट्रिलियन डॉलर, लेकिन तेल कटौती ने रफ्तार पर ब्रेक लगाया
2025 में सऊदी जीडीपी 1.31 ट्रिलियन डॉलर पहुंची और एफडीआई 35.5 अरब डॉलर रही, फिर भी विज़न 2030 के कई लक्ष्य अधूरे। मोरक्को में सार्वजनिक निवेश ने 4.9% वृद्धि दी, दक्षिण अफ्रीका 0.5% बढ़ा, लेकिन ईरान युद्ध की आहट से आगे की राह अनिश्चित।

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था ने 2025 में एक बड़ा मुकाम हासिल किया—वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 1.31 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा और गैर-तेल क्षेत्रों ने आर्थिक उत्पादन में 55 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। राष्ट्रीय परिवर्तन कार्यक्रम (एनटीपी) 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह बढ़कर 35.5 अरब डॉलर हो गया, जो 2017 के स्तर का लगभग पांच गुना है [A1]। लेकिन ठीक इसी अवधि में विज़न 2030 की एक दूसरी समीक्षा बताती है कि सार्वजनिक निवेश कोष (पीआईएफ) की परिसंपत्तियां 910 अरब डॉलर पर अटकी रहीं और एफडीआई, जीडीपी के 2.8 प्रतिशत के साथ 3.4 प्रतिशत के लक्ष्य से पीछे रहा [A8]। यह विरोधाभास बताता है कि उपलब्धियों और महत्वाकांक्षाओं के बीच अभी काफी दूरी है।
2026 की पहली तिमाही में यह दूरी और गहराई से उभरी। सऊदी अर्थव्यवस्था ने साल-दर-साल 3.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसमें गैर-तेल गतिविधियों ने 1.7 प्रतिशत अंक का योगदान दिया [A4]। मगर पिछले छह तिमाहियों की तुलना में यह सबसे धीमी रफ्तार थी; तेल गतिविधियां तिमाही आधार पर 6.8 प्रतिशत सिकुड़ गईं, जिसका सीधा संबंध ओपेक+ के उत्पादन समायोजन से था [A7]। गौरतलब है कि वित्त, बीमा और व्यावसायिक सेवाएं 5.4 प्रतिशत वृद्धि के साथ आगे रहीं, जबकि मदीना में होटल अधिभोग दर 2025 में 75 प्रतिशत के तीन वर्षीय शिखर पर पहुंच गई—यह पर्यटन और उमराह यात्रियों की बढ़ती मांग को दर्शाता है [A5] [A4]। लेकिन यह गति तेल पर निर्भरता कम करने की राह पर नए सिरे से सवाल खड़े करती है।
उत्तरी अफ्रीका में मोरक्को ने 2025 में 4.9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल की, मगर इसके पीछे सार्वजनिक निवेश का दबदबा रहा। सकल निवेश ने वृद्धि में पांच प्रतिशत अंक का योगदान दिया, जबकि घरेलू खपत कमजोर रही और गैर-कृषि गतिविधि धीमी पड़ गई [A6]। पर्यटन मोर्चे पर रौनक रही—19.8 मिलियन आगंतुकों के साथ मोरक्को वैश्विक रैंकिंग में 22वें स्थान पर पहुंच गया और पर्यटन प्राप्तियां 14.8 अरब डॉलर तक पहुंच गईं [A3]। फिर भी, सार्वजनिक निवेश पर अत्यधिक निर्भरता यह संकेत देती है कि निजी क्षेत्र को गति देने की चुनौती अभी बाकी है।
दक्षिण अफ्रीका ने 2026 की पहली तिमाही में 0.5 प्रतिशत की मौसमी समायोजित वृद्धि दर्ज की, जो अपेक्षाओं से बेहतर थी। दस में से नौ क्षेत्रों में विस्तार हुआ, केवल विनिर्माण में संकुचन रहा, लेकिन स्थायी निवेश में दो तिमाहियों की बढ़त के बाद गिरावट आई [A2]। सांख्यिकी एजेंसी ने आगाह किया कि ईरान युद्ध का प्रभाव अगली तिमाही के आंकड़ों में दिख सकता है, जो पूरे क्षेत्र के लिए एक भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करता है।
कुल मिलाकर, खाड़ी और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह मिली-जुली तस्वीर आगे की राह को चुनौतीपूर्ण बनाती है। सऊदी अरब को गैर-तेल विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए निजी निवेश और एफडीआई को लक्ष्य के करीब ले जाना होगा, वहीं मोरक्को जैसे देशों को सार्वजनिक खर्च के सहारे से निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली वृद्धि की ओर बढ़ना है। दक्षिण अफ्रीका का अनुभव बताता है कि भू-राजनीतिक झटके किसी भी सुधार को पलट सकते हैं—ऐसे में स्थायी विस्तार के लिए संरचनात्मक सुधार और निवेश विविधीकरण ही मुख्य सहारा बनेंगे।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
सऊदी अरब की ‘विजन 2030’ रंग ला रही है: अर्थव्यवस्था 1.31 खरब डॉलर को पार कर गई, गैर-तेल क्षेत्र विकास का नेतृत्व कर रहे हैं, मदीना में होटल ऑक्यूपेंसी तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में पांच गुना वृद्धि हुई, हालाँकि कुछ लक्ष्य हल्के से चूक गए। यह एक व्यावहारिक विविधीकरण की सफलता है, जिसके ठोस दीर्घकालिक परिणाम दिख रहे हैं।
मोरक्को के पर्यटन रिकॉर्ड और 4.9% की वृद्धि के पीछे सार्वजनिक निवेश पर अत्यधिक निर्भरता और कमज़ोर घरेलू खपत की हकीकत छिपी है; इस बीच सऊदी अरब ने तेल गतिविधि में गिरावट के कारण छह तिमाहियों में सबसे धीमी तिमाही वृद्धि दर्ज की। आँकड़े जश्न नहीं, व्यावहारिकता की माँग करते हैं।
सउदी गैर-तेल वृद्धि और मोरक्को के पर्यटन लाभ उल्लेखनीय हैं, लेकिन राजशाही ने विज़न 2030 के प्रमुख लक्ष्यों को चूका और दक्षिण अफ्रीका की मामूली वृद्धि जल्द ही ईरान युद्ध का झटका महसूस कर सकती है। विश्लेषक सतर्क बने हुए हैं, देख रहे हैं कि क्या विविधीकरण बाहरी जोखिमों को संतुलित कर सकता है।
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