आईएमएफ की चेतावनी: वैश्विक सरकारी कर्ज 2029 तक जीडीपी के 100% को पार करेगा, तुरंत राजकोषीय सुधार की जरूरत
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वसंत बैठकों में सरकारों से राजकोषीय समायोजन में तेजी लाने का आग्रह किया; अमेरिका का कर्ज 2031 तक 142% तक पहुंचने का अनुमान, ईरान संकट ने बढ़ाई चिंता।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी वसंत बैठकों में दुनिया भर की सरकारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2029 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 100 प्रतिशत के स्तर को छू लेगा—यह वह मुकाम है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के वर्षों में ही देखा गया था [A2][A4]। कोष के राजकोषीय मॉनिटर के अनुसार, 2025 में यह अनुपात 93.9 प्रतिशत था, लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सामाजिक खर्च, रक्षा और ब्याज भुगतान के बढ़ते दबाव के चलते अब यह अनुमानित समय से एक साल पहले ही शत-प्रतिशत की सीमा पार कर लेगा [A4]। आईएमएफ ने स्पष्ट किया कि “आत्मसंतोष की कोई गुंजाइश नहीं है” और सभी देशों को तत्काल राजकोषीय सुधार कर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षित करना चाहिए [A5]।
इस वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ी चिंता का केंद्र है। आईएमएफ के पूर्वानुमान के मुताबिक, अमेरिका का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक जीडीपी का 125.8 प्रतिशत और 2031 तक बढ़कर 142.1 प्रतिशत हो जाएगा—यह मार्च में पहली बार 39 खरब डॉलर के पार जाने के बाद का रुझान है [A1]। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी परिसंपत्तियों के मूल्य सुधार से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है, जो सरकारी वित्त को और कमजोर करेगी [A1]। दूसरी ओर, वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पर रहने वाली अर्थव्यवस्थाओं में चार वर्षों के भीतर चीन (126.8%), इटली (126.7%) और जापान (122.8%) का स्थान होगा, जबकि ब्राजील 106.5 प्रतिशत के साथ उनके पीछे रहेगा [A2]।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तस्वीर मिलीजुली है। रूस का सरकारी कर्ज अपेक्षाकृत कम है—2026 में 19.1 प्रतिशत और 2031 तक हर साल लगभग 2 प्रतिशत अंक बढ़कर 29.1 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले अक्टूबर के 32.8 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर है [A3]। मेक्सिको का ऋण 2026 में जीडीपी का 62.7 प्रतिशत रहने के बाद 2030 में 63.6 प्रतिशत तक जाएगा [A2]। इसके विपरीत, यूक्रेन की स्थिति बेहद गंभीर है: उसका सरकारी ऋण इस वर्ष 122.6 प्रतिशत और 2027 में चरम 137.1 प्रतिशत पर पहुंचने के बाद ही धीरे-धीरे नीचे आने की उम्मीद है [A3]।
मध्य पूर्व में ईरान संकट ने इन राजकोषीय दबावों को और तीखा कर दिया है। व्यापार युद्ध के बाद युद्ध की आशंका ने वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव को फिर से जिंदा कर दिया है [A5]। आईएमएफ का कहना है कि खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों, सख्त होती वित्तीय स्थितियों और बढ़ते रक्षा व्यय के चलते सरकारी बजट पर दोहरी मार पड़ रही है [A1][A4]। संस्था ने चेताया कि कम राजकोषीय गुंजाइश के बीच वित्तीय क्षेत्र में संक्रमण का डर भी बढ़ रहा है, इसलिए सरकारों को “गद्दी” यानी वित्तीय सुरक्षा कवच जमा करने की सलाह दी गई है [A5]।
कुल मिलाकर, आईएमएफ का संदेश साफ है: वैश्विक अर्थव्यवस्था ने लचीलापन दिखाया है, लेकिन राजकोषीय सेहत लगातार बिगड़ रही है। जलवायु, रक्षा और बूढ़ी होती आबादी से जुड़े खर्चों की मांग के बीच सरकारों के लिए कठिन समायोजन को टालना अब संभव नहीं होगा। आने वाले वर्षों में यह संतुलन—विकास को गति देने और ऋण को नियंत्रण में रखने का—सभी क्षेत्रीय गुटों के लिए सबसे बड़ी नीतिगत चुनौती बनेगा।
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