अडानी पर अमेरिकी आरोप वापसी, 18 मिलियन डॉलर का समझौता; विपक्ष ने जताई आपत्ति
अमेरिकी न्याय विभाग गौतम अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी के आपराधिक आरोप छोड़ने की योजना बना रहा है। SEC के सिविल मामले में 18 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगा। भारतीय विपक्ष ने इसे 'समझौता' बताया।

अमेरिकी न्याय विभाग भारतीय अरबपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों को छोड़ने जा रहा है, जबकि समानांतर सिविल मामले में प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के साथ 18 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ है—गौतम अडानी 6 मिलियन और सागर 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अडानी समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील रॉबर्ट जे. गिउफ्रा जूनियर की अगुआई वाली कानूनी टीम को नियुक्त किया।
इस खबर ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "समझौताकारी प्रधानमंत्री ने अडानी को बचाने का सौदा किया," और आरोप लगाया कि मोदी सरकार और ट्रंप प्रशासन के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है। रूसी अखबार कोमर्सेंट ने न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से बताया कि विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) भी अपनी जांच समाप्त करने वाला है, जिससे पूरा प्रकरण बहुपक्षीय अंत की ओर बढ़ता दिख रहा है।
बाजार ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया। अडानी समूह की कंपनियों के शेयर 3% तक उछल गए। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, मार्च 2026 तक घरेलू म्यूचुअल फंडों की अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में हिस्सेदारी 1.91% से बढ़कर 6.59% और अडानी ग्रीन एनर्जी में 0.37% से 3.22% पहुंच गई। संस्थागत निवेशक इसे भारत के विद्युतीकरण चक्र से जुड़ा दीर्घकालिक अवसंरचना निवेश मान रहे हैं।
पश्चिमी मीडिया ने मामले को मुख्यतः कानूनी नजरिए से देखा—बीबीसी ने समझौते और बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया, जबकि द इंडिपेंडेंट ने मूल मुकदमे के आरोपों को रेखांकित किया। इसके विपरीत, भारतीय मीडिया में विपक्षी आरोप और शेयर बाजार का उत्साह दो प्रमुख कथाएँ बन गईं। एक ओर न्यायिक प्रक्रिया का अंत, दूसरी ओर भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापारिक और रणनीतिक समीकरणों की आहट। हालांकि अडानी समूह के लिए यह राहत है, आलोचकों का मानना है कि मामला पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल छोड़ गया है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The US SEC closed its case against Gautam Adani and his nephew with an $18 million fine, dropping the corruption charges. The Russian press reports this as a routine financial settlement, without political or moral emphasis.
The US decision to drop charges against Gautam Adani has sparked political controversy in India, with the opposition accusing the Modi government of a quid pro quo. Meanwhile, Indian mutual funds are increasing their stakes in Adani group companies, signaling business confidence despite the allegations.
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