अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीज़ा के 100,000 डॉलर शुल्क को करार दिया अवैध
अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए विवादास्पद शुल्क को असंवैधानिक कर ठहराया, जिससे भारतीय तकनीकी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली।

एक अमेरिकी संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए विवादास्पद 100,000 डॉलर के एच-1बी वीज़ा शुल्क को अवैध करार देते हुए उस पर रोक लगा दी है। बोस्टन के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने सोमवार को अपने फैसले में कहा कि यह शुल्क वास्तव में एक ऐसा कर है जिसे कांग्रेस ने कभी अधिकृत नहीं किया, और राष्ट्रपति के पास बिना संसदीय मंजूरी के ऐसा कर लगाने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय डेमोक्रेटिक शासित 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों द्वारा दायर याचिका पर आया, जिन्होंने इस शुल्क को असंवैधानिक बताया था। हालांकि, यह मामला और जटिल हो गया है क्योंकि इससे पहले एक अन्य संघीय अदालत इसी शुल्क को वैध ठहरा चुकी थी। व्हाइट हाउस ने तुरंत अपील की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें उच्चतर न्यायालय से फैसला पलटने का पूरा भरोसा है।
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में एक उद्घोषणा के जरिए एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर यह भारी शुल्क लगाया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा और कथित दुरुपयोग को रोकना था। इस वीज़ा श्रेणी के तहत मुख्यतः प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी कामगारों को अस्थायी रोजगार की अनुमति मिलती है। भारतीय पेशेवर इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं, जो कुल एच-1बी वीज़ाधारकों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं। ट्रंप के आदेश से पहले, नियोक्ता प्रति कर्मचारी मात्र 2,000 से 5,000 डॉलर का भुगतान करते थे, जबकि नए शुल्क ने लागत को अचानक आसमान पर पहुंचा दिया। अकेले 2025 में अमेरिका ने 400,000 से अधिक एच-1बी वीज़ा स्वीकृत किए थे, जिससे यह मामला वैश्विक प्रौद्योगिकी जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया।
अदालत के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं अलग-अलग नजरिए पेश करती हैं। रूसी मीडिया ने इस फैसले को "गैरकानूनी कर" करार दिया और कांग्रेस की शक्तियों के हनन पर जोर दिया, जबकि चीनी प्रकाशनों ने इसे "असंवैधानिक" और "अवैध कराधान" के रूप में रेखांकित किया। भारतीय मीडिया ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा के लिए राहत बताया, और पूर्व मेटा इंजीनियर जैक विल्सन जैसी टेक हस्तियों ने भारतीय प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस शुल्क के कारण अमेरिका प्रतिभाशाली दिमागों को खो सकता था। स्वयं ट्रंप ने एनबीए फाइनल्स के दौरान संवाददाताओं से कहा कि संघीय न्यायाधीश "हमें बहुत कठिन समय दे रहे हैं" और उनके फैसले "देश को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं"।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल आव्रजन नीति का नहीं, बल्कि कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्ति संतुलन का भी है। फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने इसे "कर मामला" बताते हुए स्पष्ट किया कि अदालतें तेजी से कराधान के बहाने शासन की सीमाओं को परिभाषित कर रही हैं। इस बीच, एच-1बी की अनिश्चितता झेल रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों की व्यक्तिगत कहानियां सोशल मीडिया पर उभर रही हैं—जैसे एक भारतीय इंजीनियर जो नौकरी तलाशते हुए वीज़ा अवधि समाप्त होने के डर से जूझ रहा है।
आगे का रास्ता कानूनी लड़ाइयों से भरा है। यदि सरकार अपील करती है और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है, तो अंतिम निर्णय आने तक एच-1बी आवेदकों के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी। फिलहाल, यह फैसला सिलिकॉन वैली और विदेशी कामगारों के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की संपूर्ण आव्रजन विरोधी नीति—जिसमें वर्क परमिट पर प्रतिबंध और नागरिकता रद्द करने के अभियान शामिल हैं—यह संकेत देती है कि कानूनी प्रवास के रास्ते लगातार संकुचित हो रहे हैं।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
एक संघीय न्यायाधीश ने एच-1बी वीज़ा की 100,000 डॉलर की फीस को अवैध करार देते हुए रोक दिया, जिसे कांग्रेस की मंज़ूरी नहीं मिली थी। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक झटका है, जबकि वह देशीयकरण रद्द करने का अभियान जारी रखे हुए है, जिससे हज़ारों अप्रवासी भयभीत हैं।
मामला इस बात पर केंद्रित है कि 100,000 डॉलर की फीस अवैध कर है या नहीं; न्यायाधीश ने इसे कार्यकारी अधिकार का अतिक्रमण ठहराया। ट्रंप शिकायत करते हैं कि अदालतें शासन को कठिन बना रही हैं; यह विवाद उतना ही राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाओं के बारे में है जितना आव्रजन नीति के बारे में।
यह फैसला भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए बड़ी राहत है, जो एच-1बी आवेदकों का बहुमत हैं। उद्योग जगत की आवाज़ें निषेधात्मक शुल्क हटने का जश्न मना रही हैं और भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा की तारीफ कर रही हैं, लेकिन वीज़ा को लेकर चिंता की निजी कहानियाँ सिस्टम की बनी रहने वाली अनिश्चितता को दर्शाती हैं।
एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप की एच-1बी वीज़ा पर 100,000 डॉलर की लेवी को अवैध करार दिया, क्योंकि कांग्रेस ने इसे कभी मंज़ूरी नहीं दी थी, जिससे प्रशासन को एक और न्यायिक हार का सामना करना पड़ा। यह फैसला आव्रजन पर ट्रंप को मिली कानूनी झटकों की श्रृंखला में शामिल है, और व्हाइट हाउस अपील करने की कसम खाता है।
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