उत्तर कोरिया ने किया एआई-गाइडेड क्रूज मिसाइल का परीक्षण, किम जोंग उन ने निगरानी की
प्योंगयांग ने पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस सटीक मिसाइलों के सफल परीक्षण की पुष्टि की, जिन्हें शीघ्र ही सीमावर्ती तोपखाने इकाइयों में तैनात किया जाएगा।

उत्तर कोरिया ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उसने किम जोंग उन की देखरेख में एक नई हल्की बहु-उद्देश्यीय मिसाइल प्रक्षेपण प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से सुसज्जित टैक्टिकल क्रूज मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है। [A1, A2, A5] सरकारी मीडिया के अनुसार, इन मिसाइलों ने भू-भाग के अनुकूल नेविगेशन का उपयोग करते हुए 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता से भेद दिया। [A2] यह पहला अवसर है जब प्योंगयांग ने खुले तौर पर हथियार प्रणालियों में एआई के एकीकरण की बात स्वीकार की है, जिसे विशेषज्ञ उसकी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं में एक बड़ी छलांग मान रहे हैं। [A5]
दक्षिण कोरिया की सेना ने मंगलवार को उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट से पीले सागर की ओर कई प्रक्षेपास्त्रों के दागे जाने का पता लगाया था, जिनमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और तोपखाने के रॉकेट शामिल थे। [A1, A3, A4] उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए ने बाद में बताया कि यह परीक्षण राष्ट्रीय रक्षा के पाँच-वर्षीय आधुनिकीकरण लक्ष्य का हिस्सा था। [A1] किम जोंग उन ने स्वयं निरीक्षण करते हुए कहा कि ये उन्नत हथियार और स्वचालित प्रक्षेपण प्रणालियाँ आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई हैं और इन्हें तत्काल दक्षिण कोरिया की सीमा से सटी अग्रिम पंक्ति की तोपखाने इकाइयों में शामिल किया जाएगा। [A3, A4, A5]
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि एआई-गाइडेड क्रूज मिसाइलों का विकास उत्तर कोरिया के लिए खेल-परिवर्तक हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक हथियारों को भी घातक सटीकता प्रदान करता है। इन मिसाइलों की 100 किलोमीटर की मारक क्षमता दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और आसपास के महानगरीय क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है, जो लगभग 2.5 करोड़ लोगों का घर है। [A4] यह विकास कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव के एक नए दौर का संकेत है, जहाँ उत्तर कोरिया लगातार अपने मिसाइल कार्यक्रम को विविधता प्रदान कर रहा है, जिसमें परमाणु-सक्षम हथियार भी शामिल हैं। [A3]
विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर कोरिया अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपनी तकनीकी सीमाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, और एआई का प्रयोग उसकी स्वदेशी रक्षा क्षमता में आत्मनिर्भरता की ओर इशारा करता है। आने वाले महीनों में और अधिक परीक्षणों की संभावना है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और दक्षिण कोरिया, जापान तथा अमेरिका के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ गहरा सकती हैं।
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