विश्व कप से ठीक पहले ईरानी प्रशंसकों का टिकट आवंटन रद्द, अमेरिका पर लगा भेदभाव का आरोप
ईरानी फुटबॉल महासंघ ने कहा कि मैचों के लिए निर्धारित 8% टिकट कोटा अचानक वापस ले लिया गया, जिससे हजारों दर्शकों की योजनाएं चरमरा गईं और कूटनीतिक तनाव बढ़ा।

2026 फीफा विश्व कप के शुरू होने में महज तीन दिन बचे हैं, तभी ईरानी फुटबॉल महासंघ (FFIRI) ने बड़ा झटका देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरानी समर्थकों के लिए आवंटित टिकटों का पूरा कोटा रद्द कर दिया है। महासंघ के अनुसार, नियमों के तहत हर भाग लेने वाली टीम को अपने मैचों के कुल टिकटों का 8 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जिसे वह अपने प्रशंसकों में बाँट सके। ईरान ने बताया कि वह पहले ही न्यूजीलैंड, बेल्जियम और मिस्र के खिलाफ होने वाले ग्रुप मैचों के लिए यह टिकट बेचना शुरू कर चुका था, लेकिन अब उसे कोई भी टिकट प्रशंसकों को देने से रोक दिया गया है। [A1][A6][A15]
यह कदम उस वक्त उठाया गया जब दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान के साथ राजनयिक संकट गहराया हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले ही ईरानी टीम के कुछ स्टाफ सदस्यों को वीज़ा देने से इनकार कर दिया था और टीम के अमेरिका में प्रवेश को लेकर कई बाधाएँ खड़ी की थीं। [A2][A18] ईरानी पक्ष का कहना है कि टिकट का आवंटन वापस लेना भी इसी कड़ी का हिस्सा है और यह खेल की निष्पक्षता के खिलाफ़ एक “भेदभावपूर्ण” कार्रवाई है। [A1][A13]
अलग-अलग देशों की मीडिया ने इस मामले को अपने-अपने नज़रिए से पेश किया। इतालवी अखबार ‘ला रिपब्लिका’ और ‘इल पोस्ट’ ने स्पष्ट किया कि यह आवंटन फीफा ने ही वापस लिया, लेकिन ईरानी महासंघ सीधे अमेरिकी मेज़बानी व्यवस्था को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है। [A8][A24] ब्राज़ील के ‘वैलोर इकोनॉमिको’ और अमेरिकी ‘न्यूज़वीक’ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कई ईरानी प्रशंसक पहले ही यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर चुके थे, जो अब बेकार हो गई है। [A3][A10] वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है। [A15][A20]
अब तक न तो फीफा और न ही अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान आया है। ईरानी महासंघ ने फीफा से हस्तक्षेप करने की अपील की है और चेताया है कि इस तरह की राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाइयाँ विश्व फुटबॉल की एकता को कमज़ोर करेंगी। [A5][A23] विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फीफा इस मामले में चुप रहता है तो इससे भविष्य के टूर्नामेंटों में मेज़बान देशों को भाग लेने वाली टीमों के खिलाफ़ इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की खुली छूट मिल सकती है, खासकर जब वे देश युद्धरत हों। [A22][A27]
कुल मिलाकर, यह पूरा प्रकरण खेल और कूटनीति के बीच बढ़ते टकराव को रेखांकित करता है। जहाँ एक ओर ईरानी प्रशंसक अपनी टीम को दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर देखने से वंचित रह जाएँगे, वहीं यह भी साफ हो गया है कि 2026 का विश्व कप महज एक खेल आयोजन न रहकर भू-राजनीतिक तनावों का अखाड़ा बन चुका है। [A14][A26]
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
ईरान की फुटबॉल फेडरेशन सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका पर आरोप लगाती है कि उसने आखिरी समय पर विश्व कप टिकट कोटा रद्द कर दिया, और इसे अपने समर्थकों के विरुद्ध लक्षित राजनीतिक बाधा बताया। वह इस बात पर जोर देती है कि कई प्रशंसकों ने आधिकारिक आवंटन पर भरोसा करते हुए पहले ही यात्रा और आवास की व्यवस्था कर ली थी, और अब उन्हें खुले भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकरण को खेल सिद्धांतों और भागीदार देशों के साथ समान व्यवहार के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है।
विश्व कप से कुछ दिन पहले, ईरान के फुटबॉल संघ ने घोषणा की कि उसका टिकट आबंटन रद्द कर दिया गया है, जिससे यात्रा की तैयारी कर चुके प्रशंसक बिना टिकट के रह गए। रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दोषारोपण से बचती है, परंतु यह रेखांकित करती है कि ईरान की भागीदारी शुरू से ही राजनीतिक तनावों और नौकरशाही बाधाओं से ग्रस्त रही है।
ईरान का फुटबॉल फेडरेशन कहता है कि ग्रुप-स्टेज मैचों के लिए उसका मानक 8% टिकट आबंटन टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले वापस ले लिया गया, जिससे यात्रा योजना बना चुके प्रशंसक प्रभावित हुए। फेडरेशन फीफा से स्पष्टीकरण मांग रहा है और नोट करता है कि यह निर्णय सभी योग्य टीमों पर लागू आबंटन नियमों के विपरीत प्रतीत होता है।
2026 विश्व कप के आयोजकों ने अंतिम क्षण में ईरान का टिकट कोटा वापस ले लिया, जो राष्ट्रों के बीच समान पहुंच के सिद्धांत का उल्लंघन है। जिन प्रशंसकों ने पहले ही अपनी यात्रा की योजना बना ली थी, वे राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण फंसे हुए हैं; इससे टूर्नामेंट की सत्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
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