यूएन जांच: इज़राइली बल बसनेवालों के हमलों को संरक्षण देते हैं, फ़िलिस्तीनी नागरिक दोहरी पीड़ा में
संयुक्त राष्ट्र आयोग की नई रिपोर्ट में खुलासा—इज़राइली अधिकारी सुनियोजित ढंग से बसनेवालों की हिंसा को वित्तीय और सैन्य सहारा देते हैं, वहीं हमास भी नागरिकों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का दोषी पाया गया।

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच ने मंगलवार को चौंकाने वाला निष्कर्ष जारी करते हुए कहा कि इज़राइली अधिकारी कब्ज़े वाले पश्चिमी तट में बसनेवालों द्वारा किए जा रहे हमलों में सीधे शामिल हैं और सुरक्षा बल हमलावरों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। जांच आयोग के अनुसार, इज़राइली प्रशासन ने वित्तीय और सैन्य सहायता के ज़रिए इन हमलों को संभव बनाया है, जबकि न्यायिक और क़ानून-प्रवर्तन तंत्र ने दंडमुक्ति का ऐसा माहौल बना दिया है कि 2023 से फ़िलिस्तीनी गांवों और कृषि भूमि पर हमलों में 130 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई [A1][A2]। नक़ाबपोश हमलावरों की टुकड़ियां तेज़ी से सक्रिय हुई हैं और विस्थापन व मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि फ़िलिस्तीनी नागरिक दो चक्की के पाटों के बीच पिस रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “फ़िलिस्तीनी असैन्य आबादी को व्यवस्थित और जानबूझकर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार बनाया जा रहा है—एक ओर इज़राइली सेना और बसनेवाले तो दूसरी ओर हमास का आतंक शासन” [A3][A5]। ग़ज़ा की युद्धग्रस्त पट्टी और पश्चिमी तट दोनों जगह नागरिक “सामूहिक अत्याचारों” के बीच फंसे हुए हैं। पिछले वर्ष इसी जांच दल ने इज़राइल के ख़िलाफ़ ‘नरसंहार’ का निष्कर्ष दिया था, और ताज़ा दस्तावेज़ उसी गंभीर परिघटना को आगे बढ़ाता है [A5]।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की मीडिया ने इस रिपोर्ट को अपने-अपने नज़रिए से रेखांकित किया है। इज़राइली अख़बार जेरूसलम पोस्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रिपोर्ट में हमास को भी फ़िलिस्तीनियों और इज़राइलियों दोनों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का दोषी ठहराया गया है, पर इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय या सेना की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई [A2]। ब्राज़ील के वेलोर एकोनोमिको और फ्रांस के ल देव्वा ने नागरिकों की दोहरी विवशता को केंद्र में रखा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई प्रसारण निगम ने बताया कि यह रिपोर्ट जल्द ही मानवाधिकार परिषद में पेश की जाएगी [A4]। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट ने उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को उभारा जो इस आयोग को पहले ही इज़राइल पर नरसंहार का आरोप लगाने के लिए प्रेरित कर चुकी है [A5]।
आगे का रास्ता अंतरराष्ट्रीय राजनीति की उलझनों से भरा है। जांच आयोग ने अध्ययन को मानवाधिकार परिषद के समक्ष रखने की तैयारी कर ली है, लेकिन इसके ठोस परिणाम अब भी संदिग्ध हैं [A4]। एक साल पहले के ‘नरसंहार’ के निष्कर्ष के बावजूद बड़ी शक्तियों की प्रतिक्रिया बंटी रही, और इसी दंडमुक्ति के माहौल ने बसनेवालों की हिंसा को और हवा दी है [A1][A6]। फ़िलिस्तीनी नागरिकों के लिए यह रिपोर्ट एक नैतिक जीत भर हो सकती है—ज़मीनी हक़ीक़त में बदलाव की गुंजाइश बेहद सीमित नज़र आती है।
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संयुक्त राष्ट्र ने इज़राइल पर बसने वालों की हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, लेकिन उसकी रिपोर्ट में हमास द्वारा युद्ध अपराधों की पुष्टि भी हुई। इज़राइली अधिकारियों ने जांच के पूर्वाग्रह की निंदा की और सुरक्षा ख़तरों की ओर इशारा किया।
संयुक्त राष्ट्र की जांच ने पुष्टि की है कि इज़राइली सेनाएँ फ़िलिस्तीनियों पर हमलों के दौरान बसने वालों को सुरक्षा प्रदान करती हैं। इज़राइली प्राधिकरण सीधे हिंसा को सक्षम करने और दण्डमुक्ति सुनिश्चित करने में शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों लोग मारे गए और विस्थापित हुए।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट फ़िलिस्तीनियों की क्रूर वास्तविकता को उजागर करती है, जो इज़राइली सेनाओं, बसने वालों और हमास के क्रूर शासन के बीच फंसे हुए हैं। आयोग गाज़ा और वेस्ट बैंक में नागरिकों के विरुद्ध व्यवस्थित और जानबूझकर किए गए अधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण करता है।
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