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होर्मुज़ जलडमरूमध्य: खोलने की घोषणा, लेकिन जहाज़ फिर लौटे—शांति अब भी अनिश्चित

ईरान ने जलडमरूमध्य को 'पूरी तरह खुला' बताया, मगर वास्तविकता विपरीत रही। ट्रंप ने परमाणु समझौते के दावे किए, तेहरान ने उन्हें 'झूठ' करार दिया, और बुधवार की समय-सीमा पर युद्धविराम टूटने का खतरा बरकरार है।

भूराजनीति26 स्रोत7 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 08:21

शुक्रवार सुबह जब ईरान ने घोषणा की कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य वाणिज्यिक यातायात के लिए "पूरी तरह खुला" है, वैश्विक बाज़ारों ने राहत की साँस ली और कच्चे तेल के दाम 10% तक लुढ़क गए [A34] [A19]। किंतु शाम ढलते-ढलते जहाज़ों की आवाजाही पर नज़र रखने वाली कंपनी कैप्लर ने बताया कि करीब बीस मालवाहक पोत बिना किसी स्पष्ट कारण के जलडमरूमध्य से वापस लौट गए [A1] [A7]। यह विरोधाभास एक ऐसे संकट की असली तस्वीर पेश करता है, जिसमें अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी अब भी जारी है और तेहरान अपनी शर्तों पर ही आवाजाही की इजाज़त दे रहा है [A13] [A8]।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी दिन सोशल मीडिया और साक्षात्कारों में दावा किया कि ईरान के साथ समझौता "बहुत करीब" है और अब कोई अड़चन नहीं बची [A11] [A18]। उन्होंने कहा कि तेहरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका भेजने और अपने परमाणु कार्यक्रम को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने पर राज़ी हो गया है [A10] [A24] [A27]। लेकिन चंद घंटों में ही ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से नकार दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने टीवी पर स्पष्ट किया कि "ईरान का समृद्ध यूरेनियम कहीं नहीं जाएगा" [A5] [A17]। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ ने ट्रंप के बयानों को "एक घंटे में सात झूठ" करार देते हुए चेतावनी दी कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो जलडमरूमध्य फिर बंद हो सकता है [A9]।

पश्चिमी मीडिया और यूरोपीय नेता इस दोहरे संकट को अलग-अलग नज़रिए से देख रहे हैं। अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने होर्मुज़ को अपना "प्रलय-दिवस हथियार" बना लिया है, जिसके ज़रिए वह बिना परमाणु बम के ही आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुँचा सकता है [A31]। फ्राँस और ब्रिटेन ने एक रक्षात्मक सैन्य मिशन की योजना बनाई है, जिसमें इटली और जर्मनी भी शामिल हो सकते हैं, ताकि जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके [A22] [A25]। ट्रंप ने इस पहल पर तंज कसते हुए कहा कि नाटो ने तब मदद की पेशकश की जब स्थिति लगभग सुलझ चुकी है, "हमें कभी उनकी ज़रूरत नहीं थी" [A29]।

रूसी और भारतीय परिप्रेक्ष्य इस संकट के आर्थिक पहलू पर ज़ोर देते हैं। रूसी विशेषज्ञों का कहना है कि यह नाज़ुक युद्धविराम तभी तक टिकेगा जब तक पाकिस्तान की मध्यस्थता में सोमवार को होने वाली बातचीत से कोई ढाँचागत दस्तावेज़ सामने आता है [A3] [A13]। भारतीय मीडिया ने ट्रंप की उस चेतावनी को प्रमुखता दी है जिसमें उन्होंने कहा कि अगर बुधवार तक व्यापक समझौता नहीं हुआ तो युद्धविराम समाप्त कर बमबारी फिर शुरू कर दी जाएगी [A20] [A21]। तेहरान ने भी धमकी दी है कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने पर पूरे मध्य-पूर्व में ऊर्जा ढाँचे को "अपरिवर्तनीय रूप से नष्ट" किया जा सकता है [A16]।

यह स्थिति केवल एक जलडमरूमध्य के खुलने या बंद होने की नहीं है—यह दो शक्तियों के बीच भरोसे की भारी कमी और मीडिया के ज़रिए चल रही सूचना-जंग का प्रतीक है। जहाँ ट्रंप "बहुत अच्छी ख़बर" आने की बात करते हैं, वहीं ईरान उन्हें "वैकल्पिक तथ्य" कहकर ख़ारिज कर देता है [A15] [A33]। आने वाले दिनों में या तो पाकिस्तान में कोई सीमित समझौता आकार लेगा या फिर दुनिया एक बार फिर बढ़ते तेल दामों और फौजी टकराव की आँच महसूस करेगी। फिलहाल, होर्मुज़ की लहरों पर जहाज़ों की आवाजाही उसी तरह अनिश्चित है जैसे कूटनीति की मेज़ पर जारी जिरह।

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