विश्व कप 2026: टिकटों और परिवहन की बढ़ती लागत पर FIFA को घेर रहे मेज़बान शहर
न्यू जर्सी की गवर्नर ने FIFA से प्रशंसकों के परिवहन का खर्च उठाने की मांग की, जबकि बोस्टन में ट्रेन किराया चार गुना हो गया; टिकटों की कीमतें बढ़ने और टेलगेटिंग पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

2026 फीफा विश्व कप शुरू होने में कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन मैदान के बाहर की लड़ाइयाँ तेज़ हो गई हैं। सबसे तीखा विवाद परिवहन लागत को लेकर है, जहाँ मेज़बान शहर FIFA पर दबाव बना रहे हैं। न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल ने एक वीडियो जारी कर कहा कि मेटलाइफ स्टेडियम तक ट्रेन का किराया 100 डॉलर से अधिक होने की खबरों के बीच FIFA को प्रशंसकों के सफर का खर्च उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके राज्य को न्यू जर्सी ट्रांज़िट के लिए 4.8 करोड़ डॉलर का बिल झेलना पड़ रहा है, जबकि FIFA इस टूर्नामेंट से 11 अरब डॉलर कमा रहा है [A6]। FIFA ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि 2018 के मूल मेज़बान शहर समझौतों में मुफ्त परिवहन की शर्त थी, लेकिन 2023 में वित्तीय दबाव देखते हुए इसे हटा दिया गया [A8]। यह विवाद केवल पूर्वी तट तक सीमित नहीं है। बोस्टन में जिलेट स्टेडियम तक जाने वाली ट्रेन का राउंड-ट्रिप किराया 20 डॉलर से सीधे 80 डॉलर कर दिया गया है, जो सामान्य आयोजनों की तुलना में चार गुना है [A3]।
इसी बीच, अमेरिकी खेल संस्कृति के एक अहम हिस्से ‘टेलगेटिंग’ को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि FIFA ने स्टेडियम पार्किंग में गाड़ियों के पास खाने-पीने की इस परंपरा पर प्रतिबंध लगा दिया है। FIFA ने सीधे जवाब देते हुए कहा कि उसकी कोई औपचारिक नीति नहीं है जो टेलगेटिंग को रोकती हो, हालाँकि स्थानीय सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के तहत कुछ स्थलों पर पाबंदियाँ लग सकती हैं [A4]। फिर भी, कई रिपोर्टों के अनुसार एरोहेड स्टेडियम, जिलेट स्टेडियम और लिंकन फाइनेंशियल फील्ड जैसे प्रमुख NFL वेन्यू पर टेलगेटिंग की अनुमति नहीं होगी, जिससे प्रशंसकों की नाराज़गी बढ़ रही है [A12]। मेक्सिको से भी यह संकेत मिला था कि FIFA के पास टेलगेटिंग पर कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन स्टेडियम मालिकों के साथ कानूनी लड़ाइयाँ पहले ही सामने आ चुकी हैं, जैसे एस्टाडियो बानोर्टे में पैल्को मालिकों ने अपने विशेष अधिकार बरकरार रखने में सफलता पाई [A1]।
टिकटों के मोर्चे पर भी स्थिति विरोधाभासी है। ऑस्ट्रेलियाई प्रसारक के अनुसार, फीफा ने अमेरिका बनाम पैराग्वे के शुरुआती मैच के लिए ‘फ्रंट कैटेगरी’ नाम से और भी महँगे टिकट जोड़ दिए हैं, जिनकी कीमत 4,105 अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गई है [A5]। जबकि एक तरफ कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं मेक्सिको की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रुप चरण के कुछ मैचों की 29,700 से अधिक टिकटें बिना बिकी पड़ी हैं, और आश्चर्यजनक रूप से स्वयं मेज़बान अमेरिका से जुड़े मुकाबले भी इस सूची में शामिल हैं [A9]। यह अंतर FIFA के उच्च माँग वाले आधिकारिक बयानों पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय प्रशासन पर पड़ने वाला बोझ अन्य रूपों में भी उभर रहा है। टोरंटो ने फोर्ट यॉर्क और बेंटवे में होने वाले प्रशंसक उत्सवों के लिए, जिन्हें पिछले साल निःशुल्क बताया गया था, अब प्रवेश शुल्क लगाने पर विचार करना शुरू कर दिया है, क्योंकि आयोजन की लागत बढ़ गई है [A2]। यह सब तब हो रहा है जब सिएटल और वैंकूवर जैसे शहर बेहतर अनुभव के लिए सीमा-पार पर्यटन समन्वय में जुटे हैं [A7]।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि वैश्विक फुटबॉल का सबसे बड़ा आयोजन ज़मीनी स्तर पर जटिल आर्थिक समीकरणों से जूझ रहा है। एक ओर FIFA अभूतपूर्व राजस्व अर्जित करने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मेज़बान शहरों और आम प्रशंसकों की जेब पर पड़ने वाला अनियोजित बोझ इस आयोजन की छवि को धूमिल कर सकता है। आने वाले हफ्तों में FIFA को पारदर्शिता अपनाकर और प्रशंसक-अनुकूल नीतियाँ बनाकर इस भरोसे के संकट को दूर करना होगा।
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