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बोलिविया में राष्ट्रपति पाज़ को इमरजेंसी की खुली छूट, प्रदर्शनों के बीच सेना तैनात

कांग्रेस ने राज्य-अपवाद की पुरानी सीमाओं को खत्म कर दिया, जिसके बाद रॉड्रिगो पाज़ ने चार सप्ताह से जारी सड़क जाम और ईंधन संकट के बीच सेना उतार दी।

भूराजनीति11 स्रोत4 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 04:42

बोलिविया में राजनीतिक संकट ने नया मोड़ ले लिया जब कांग्रेस ने उस कानून को निरस्त कर दिया जो राष्ट्रपति को राज्य-अपवाद घोषित करने में सीमाएँ लगाता था। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति रॉड्रिगो पाज़ पेरेरा ने देश में आपातकाल की घोषणा कर सेना को सड़कों पर उतार दिया। यह कदम चार सप्ताह से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों और राजमार्गों की नाकेबंदी के बीच उठाया गया, जिसने ला पाज़ और एल आल्टो जैसे शहरों को खाद्य, ईंधन और दवाओं की भारी किल्लत से घेर दिया था।

प्रदर्शनों की शुरुआत एक महीने पहले तब हुई जब पाज़ ने एक भूमि सुधार का प्रस्ताव रखा, जिससे बड़ी कंपनियों को छोटे किसानों की ज़मीन खरीदने में आसानी होती। हालाँकि राष्ट्रपति ने स्वैच्छिक बिक्री का वादा किया, किसानों ने उन पर भरोसा नहीं किया और प्रमुख सड़कें जाम कर दीं। जल्द ही यह आंदोलन खनन मज़दूरों, श्रमिक संघों और पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस के समर्थकों से जुड़ गया, जो पाज़ की उदार आर्थिक नीतियों, खासकर ईंधन सब्सिडी में कटौती के खिलाफ थे। खनिकों ने कई जगहों पर डायनामाइट भी फेंके। राजधानी ला पाज़ में बस चालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने सार्वजनिक परिवहन ठप कर दिया और ईंधन की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए।

कानूनी बदलाव से पहले, वर्ष 2020 की लेई 1341 सेना की आंतरिक संघर्षों में दखल को सीमित करती थी। सांसद कार्लोस अलार्कोन ने इसे "ताला" बताकर खत्म करने की वकालत की, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने भी इसका समर्थन किया। हालाँकि, कुछ विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी कि इससे सत्ता का दुरुपयोग और संघर्ष का सैन्यीकरण बढ़ सकता है। चर्च ने भी दमन से बचने और तत्काल राजनीतिक संवाद की अपील की। इस बीच सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति मोरालेस पर प्रदर्शनों का नेतृत्व करने और लोकतंत्र को गिराने की कोशिश का आरोप लगाया, जबकि सप्ताहांत में एक सैन्य-पुलिस कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई।

विश्लेषकों के अनुसार, पाज़ जैसे दक्षिण अमेरिकी दक्षिणपंथी नेताओं की लोकप्रियता रिकॉर्ड ऊंचाई से तेजी से गिरी है, क्योंकि कठोर आर्थिक सुधारों ने "सामाजिक धैर्य" को तोड़ दिया है। पाज़ ने स्वीकार किया कि वे देश को एकजुट करने में विफल रहे, लेकिन चेतावनी दी कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो वे कड़ा रुख अपनाएंगे। फिलहाल, सेना की तैनाती से सड़कें खुलने की उम्मीद है, पर गहराता राजनीतिक ध्रुवीकरण यह संकेत देता है कि बोलिविया में स्थायी शांति अभी दूर है।

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