2025: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराज्यीय संघर्षों का सर्वाधिक स्तर, 2.45 लाख मौतें
दुनिया ने 2025 में अस्सी सालों में सबसे ज़्यादा राज्य-दर-राज्य युद्ध देखे, हमले दोगुने हुए; रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे ख़ूनी रहा।

दुनिया ने 2025 में हिंसा का ऐसा स्तर देखा जो द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद कभी दर्ज नहीं किया गया। उप्साला विश्वविद्यालय के संघर्ष डेटा कार्यक्रम और ओस्लो शांति अनुसंधान संस्थान की अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल कम से कम एक सरकारी पक्ष वाले 65 सशस्त्र संघर्ष दर्ज हुए — 1946 के बाद का सर्वोच्च आँकड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि राज्यों के बीच सीधे टकराव की संख्या लगातार दूसरे साल दोगुनी होकर आठ तक पहुँच गई, जिसमें भारत-पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच सीमा झड़पों से लेकर यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और सीरिया में इज़रायली सैन्य अभियान तक शामिल थे।
इन हिंसक घटनाओं में करीब 2,44,600 से 2,45,000 लोगों की जान गई, जिनमें से 94,700 मौतें अकेले रूस-यूक्रेन युद्ध में हुईं। यह आँकड़ा 1994 के रवांडा नरसंहार के बाद का दूसरा और शीत युद्ध की समाप्ति के बाद का तीसरा सबसे ख़ूनी साल बना। ओस्लो संस्थान की शोधकर्ता सिरी आस रुस्टैड ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “दुर्भाग्य से, इसमें से बहुत कुछ सकारात्मक निकालने लायक नहीं है… आमतौर पर मैं कोई न कोई सकारात्मक पक्ष ढूँढ़ ही लेती हूँ, लेकिन इस बार आँकड़े स्तब्ध कर देने वाले हैं।”
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यह हिंसा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। यूरोप में यूक्रेन युद्ध ने भारी तबाही मचाई, जबकि मध्य पूर्व में ईरान-इज़रायल तनाव और सीरिया में इज़रायली कार्रवाइयों ने आग भड़काई। दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर गोलीबारी तथा अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर झड़पों ने लंबे समय से सुलगते विवादों को फिर हवा दी। सभी जगह नागरिकों पर हमलों में भारी वृद्धि देखी गई, जिसने मानवीय संकट को और गहरा किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया एक नए उच्च-हिंसा युग में प्रवेश कर चुकी है। जिस सापेक्ष शांति का दौर शीत युद्ध के बाद आशा जगाता था, वह अब तेज़ी से पीछे छूट रहा है। एक साथ इतने सारे अंतरराज्यीय संघर्षों का उभरना यह संकेत देता है कि कूटनीतिक तंत्र कमज़ोर पड़ रहे हैं और प्रतिस्पर्धी शक्तियाँ सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता देने लगी हैं। रपटों में नागरिकों पर बढ़ते हमलों को लेकर ख़ास चेतावनी दी गई है, जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
2025 में अंतर-राज्यीय युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गए, जिनमें आठ सक्रिय संघर्ष और लगभग ढाई लाख मौतें हुईं। उप्साला के आँकड़े बताते हैं कि 1994 के रवांडा नरसंहार के बाद यह सबसे घातक वर्ष था, जो महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव की खतरनाक वापसी को दर्शाता है।
दुनिया उच्च हिंसा के एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है: 2025 में राज्यों के बीच संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया और नागरिकों पर हमले बढ़ गए, विशेषकर एल फ़ाशर जैसे नरसंहार। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि सकारात्मक पक्ष बहुत कम है, जो एक भयावह और अभूतपूर्व वैश्विक तस्वीर पेश करता है।
2025 में कम से कम एक सरकार वाले सशस्त्र संघर्षों की संख्या रिकॉर्ड 65 तक पहुँच गई, जो 1946 के बाद सर्वाधिक है। आठ अंतर-राज्यीय युद्ध भड़के, जिनमें भारत-पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच सीमा संघर्ष के साथ-साथ यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और सीरिया में इज़रायली सैन्य अभियान शामिल थे। प्रमुख शोधकर्ता ने समग्र रुझान पर अफ़सोस जताया।
ओस्लो शांति अनुसंधान संस्थान की नवीनतम रिपोर्ट दर्शाती है कि दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से सैन्य तनाव के उच्चतम स्तर पर है। 2025 में 65 सक्रिय संघर्ष दर्ज किए गए, अंतर-राज्यीय युद्धों की संख्या दुगनी हो गई है और नागरिकों पर हमले बढ़ रहे हैं। अध्ययन वैश्विक सुरक्षा में समग्र गिरावट की चेतावनी देता है, बिना किसी एक कारक को उजागर किए।
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