विश्व कप 2026: अमेरिकी वीज़ा न मिलने से फिलिस्तीन फुटबॉल प्रमुख का अटकना जारी
जिब्रील राजौब ने उद्घाटन मैच मेक्सिको में देखा, लेकिन अमेरिकी प्रवेश पर रोक; फीफा की एकता की अपील और सख्त वीज़ा नीति के बीच विरोधाभास उजागर।

जिब्रील राजौब, फिलिस्तीन फुटबॉल संघ के अध्यक्ष, 2026 फीफा विश्व कप के उद्घाटन मैच के बाद मेक्सिको सिटी में अटके हुए हैं। उन्होंने मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए रोमांचक मुकाबले का आनंद लिया, लेकिन इसके बाद वह अमेरिका नहीं जा सके, क्योंकि उन्हें अमेरिकी वीज़ा नहीं मिला। राजौब उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें फीफा द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी, फिर भी उन्हें वीज़ा देने से इनकार कर दिया गया या आवेदन लंबित रहा। राजौब ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "मैं नहीं मानता कि फुटबॉल का इस्तेमाल या दुरुपयोग करके दुनिया भर के सभी फुटबॉलरों के अधिकारों को नकारना उचित है।"
हालांकि फिलिस्तीन की टीम विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई, लेकिन फीफा हर बार सभी 211 सदस्य संघों के अध्यक्षों को वैश्विक एकता के प्रतीक के रूप में आमंत्रित करता है। यह पहला मामला नहीं है जब वीज़ा संबंधी दिक्कतों ने किसी खेल अधिकारी को आयोजन से दूर रखा हो; इससे पहले भी कई मौकों पर ऐसी स्थितियाँ सामने आई हैं। खासकर अमेरिका में आयोजित होने वाले आयोजनों में सुरक्षा और आप्रवासन नीतियाँ सख्त होती हैं, जो अक्सर खेल जगत के लिए चुनौती बन जाती हैं।
राजौब का मामला अमेरिकी वीज़ा नीति और फीफा की वैश्विक भागीदारी की विचारधारा के बीच बुनियादी टकराव को उजागर करता है। पिछले साल फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने घोषणा की थी कि "कनाडा, मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व कप के दौरान सभी का स्वागत होगा," और फीफा इस दिशा में काम कर रहा है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है, जैसा कि राजौब और अन्य अधिकारियों के साथ हुआ। इस विरोधाभास ने इंडोनेशियाई, पुर्तगाली, हिब्रू, फारसी और अंग्रेजी मीडिया का ध्यान खींचा है, जो इस मुद्दे को केवल खेल तक सीमित न रखकर एक व्यापक कूटनीतिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहे हैं।
एक वरिष्ठ फिलिस्तीनी राजनेता के तौर पर राजौब का यह अनुभव इस बात की याद दिलाता है कि खेल अक्सर भू-राजनीति से अछूता नहीं रहता। फीफा भले ही भेदभाव रहित वैश्विक उत्सव की बात करे, लेकिन राष्ट्रीय हित और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ कभी-कभी इस आदर्श पर भारी पड़ती हैं। राजौब अभी भी मेक्सिको में वीज़ा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें अनुमति मिलेगी या नहीं। आगे चलकर, फीफा को यह सुनिश्चित करने के लिए मेज़बान देशों के साथ मिलकर ठोस व्यवस्था बनानी होगी ताकि आयोजन में सभी मान्यता प्राप्त प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अन्यथा, 'खेल से एकता' का संदेश केवल शब्दों तक सीमित रह जाएगा।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The US has arbitrarily denied a visa to the head of Palestinian football, an unjust act showing American hostility toward Palestinians. This reflects a broader pattern of unfair treatment, even in sports.
Jibril Rajoub, a veteran Palestinian political figure, is still waiting for his US visa to attend the World Cup. He claims denial of his right to attend, but the visa process is standard procedure.
The president of the Palestinian Football Federation is stuck in Mexico awaiting a US visa for the World Cup. He criticizes the unfair denial, highlighting how visa restrictions affect even football officials.
यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ
7 स्रोत · 5 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की