ईरान समझौते पर ट्रंप की शर्त: अरब देश इज़राइल को मान्यता दें, अब्राहम अकॉर्ड अनिवार्य
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता में सऊदी अरब, क़तर, तुर्की और पाकिस्तान से अब्राहम समझौते पर एक साथ हस्ताक्षर करने की अनिवार्य मांग की, जबकि युद्धविराम उल्लंघन ने बातचीत की उलझन बढ़ा दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी शांति वार्ता को एक नई शर्त से जोड़ दिया है—क्षेत्र के प्रमुख मुस्लिम देशों को इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले अब्राहम समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर करने होंगे। सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने इसे “अनिवार्य” करार देते हुए लिखा कि वह अपने प्रतिनिधियों को इन देशों को पहले से ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने और सफलतापूर्वक पूरा करने का अनुरोध करते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो “युद्ध के मैदान और गोलीबारी की ओर लौटना होगा, जो पहले से कहीं बड़ा और मजबूत होगा।”
यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगभग सात सप्ताह पुराना युद्धविराम पहले ही दरकने लगा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार तड़के दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान प्रांत में मिसाइल लॉन्च स्थलों और माइन बिछाने वाली नौकाओं पर “आत्मरक्षा” के नाम पर हमले किए, जिसे ईरान के विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम का “घोर उल्लंघन” बताया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हालाँकि कहा कि समझौता “कुछ दिन” में संभव हो सकता है। इन्हीं तनावों के बीच ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि बातचीत “अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है” और यह “सभी के लिए बड़ा समझौता होगा या बिलकुल नहीं।”
स्वीडिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की अनिवार्यता की घोषणा को सऊदी अरब जैसे अहम देशों की शर्तों से टकराव का सामना करना पड़ सकता है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने के बदले फ़लस्तीनियों के लिए “दो-राज्य समाधान की ओर एक स्पष्ट राह” अनिवार्य बताई है। इसके अतिरिक्त, ट्रंप ने शनिवार को सऊदी अरब, बहरीन, क़तर, मिस्र, जॉर्डन, तुर्की और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत में ज़ोर देकर कहा कि सभी देशों को “न्यूनतम रूप से एक साथ” अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। फिलहाल सिर्फ़ संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान ही इस समझौते का हिस्सा हैं।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में संभावना जताई कि अंततः ईरान भी इस “अभूतपूर्व वैश्विक गठबंधन” में शामिल हो सकता है और इसे “सम्मान की बात” बताया। यह जटिल कूटनीतिक चाल फरवरी 2026 के अंत में भड़के अमेरिका-ईरान युद्ध के समाधान को एक व्यापक क्षेत्रीय पुनर्गठन से जोड़ती है, जिसमें इज़राइल को व्यापक अरब-मुस्लिम स्वीकृति मिल सके। लेकिन फ़लस्तीनी मुद्दे पर अड़चन और युद्धविराम की नाज़ुक स्थिति को देखते हुए यह मार्ग बेहद अनिश्चित नज़र आता है। विश्लेषकों के मुताबिक़, शांति प्रक्रिया में अब्राहम समझौते का अनिवार्य जोड़ समझौते को और पेचीदा बना सकता है।
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