रूस की नई मानवाधिकार आयुक्त बनीं याना लांत्रातोवा, विवादों से घिरी नियुक्ति पर अंतरराष्ट्रीय चिंता
स्टेट ड्यूमा ने सांसद याना लांत्रातोवा को तात्याना मोस्कालकोवा की जगह चुना; यूक्रेन युद्ध में बच्चों के जबरन स्थानांतरण के आरोपों और स्कूली पाठ्यक्रम से कहानी हटवाने जैसे विवादों वाली पृष्ठभूमि के चलते स्वतंत्र मीडिया सवाल उठा रहा है।

रूस में मानवाधिकार संरक्षण की संस्था के शीर्ष पर अब आलोचकों की नज़र में एक विवादास्पद हस्ती बैठ गई है। 14 मई को राज्य ड्यूमा ने याना लांत्रातोवा को देश की नई संघीय मानवाधिकार आयुक्त नियुक्त किया [A5][A11]। सत्तारूढ़ दल के समर्थन से हुए गुप्त मतदान में उन्हें 301 वोट मिले, जबकि विपक्ष में 4 सदस्य विरोधी थे और दो ने मतदान से परहेज़ किया [A5]। “स्प्रावेदलिवाया रोसिया” पार्टी से आने वाली लांत्रातोवा ने दो अन्य उम्मीदवारों – आर्तोम प्रोकोफ़्येव और इवान सुखारेव – को हराकर तात्याना मोस्कालकोवा का कार्यकाल समाप्त होने पर यह पदभार संभाला [A7][A11]।
लांत्रातोवा की नियुक्ति की ख़बर ने उनके अतीत को फिर से चर्चा में ला दिया है। स्वतंत्र रूसी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार, उन्होंने अपनी सार्वजनिक शुरुआत “मोलोदाया ग्वार्दिया” के कार्यकर्ता के रूप में की थी और बाद में विटाली मिलोनोव की सहायक रहते हुए पीडोफाइल पकड़ने के अभियानों में हिस्सा लिया [A1][A3]। बतौर सांसद उनके एक शिकायत पत्र के बाद स्कूली पाठ्यक्रम से व्लादिमीर मकानिन की कहानी “काव्काज़्स्की प्लेन्निक” हटा दी गई थी [A1][A14]। यूक्रेन में उन पर ख़ेरसॉन क्षेत्र से बच्चों को जबरन निकालने में शामिल होने का आरोप है [A1][A6], जिसके चलते वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध सूची में भी हैं [A12]। “मेदूज़ा” की रिपोर्ट के अनुसार उनकी इस नियुक्ति की पैरवी फ़िल्मकार निकिता मिख़ालकोव और राष्ट्रपति प्रशासन के आंद्रेई यारिन ने की [A4]।
राज्य-समर्थित मीडिया ने इसके विपरीत लांत्रातोवा के प्राथमिकता क्षेत्रों पर ज़ोर दिया। उन्होंने पहले ही टिप्पणी में “विशेष सैन्य अभियान” के प्रतिभागियों और उनके परिवारों की सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है, साथ ही जर्जर आवासों से पुनर्वास और अनाथ बच्चों के लिए आवास सुनिश्चित करने की बात कही [A9][A16]। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही राष्ट्रपति पुतिन उनसे मुलाक़ात करेंगे [A10]।
सेवानिवृत्त हो रहीं तात्याना मोस्कालकोवा ने इस दौरान राज्य ड्यूमा में लौटने की इच्छा जताई, हालांकि उन्होंने इसे अंतिम निर्णय नहीं बताया [A2][A13]। पुलिस की पूर्व जनरल मोस्कालकोवा दो कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ रही हैं; उनके काम की प्रशंसा करते हुए स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोदिन ने कहा कि संस्था में सुधार हुआ [A5][A15]।
यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब रूस का मानवाधिकार ढांचा पहले से ही पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना के घेरे में है। मॉस्को टाइम्स जैसे अंग्रेज़ी माध्यमों ने चेताया कि यूक्रेन के साथ भविष्य के क़ैदियों की अदला-बदली में लांत्रातोवा की भूमिका जटिलताएं खड़ी कर सकती है, क्योंकि उन पर बच्चों के जबरन स्थानांतरण के आरोप हैं [A12]। विश्लेषकों का मानना है कि स्वतंत्र प्रेस में उजागर हुए ये विवाद, राज्य मीडिया द्वारा चित्रित तस्वीर से बिल्कुल भिन्न संस्थागत विश्वसनीयता का संकट दर्शाते हैं। लांत्रातोवा के सामने अपनी मानवाधिकार छवि को तटस्थ बनाए रखने की चुनौती होगी, ख़ासकर तब जब वे ऐसे मामलों से जुड़ी हैं जिनमें स्वयं उन्हीं पर अधिकार हनन का आरोप लग चुका है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Continental European press highlights the controversial background of Yana Lantratova, citing her role in removing a school book and accusations of forced child transfers from occupied Ukraine. The tone is critical, framing the appointment as a setback for human rights and a potential complication for future prisoner exchanges with Ukraine. The vote in parliament is presented as procedural theater with little democratic legitimacy.
Russian state-aligned media report Lantratova's election as a routine procedural success, emphasizing the large majority of votes and her stated priorities: support for military participants and vulnerable families. The coverage focuses on the orderly transition from outgoing ombudsman Moskalkova and the expected meeting with President Putin. The narrative is neutral in tone but implicitly endorses the appointment as a continuation of responsible governance.
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