पेरिस में दो-राष्ट्र समाधान पर दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन: आशा और कठोर यथार्थ के बीच
फ्रांस ने इजरायली-फिलिस्तीनी नागरिक समूहों और 15 से अधिक देशों को एकजुट किया; जकार्ता में रविवार को फिलिस्तीन समर्थन रैली की घोषणा।

फ्रांस ने 12 जून को पेरिस में इजरायल-फिलिस्तीन दो-राष्ट्र समाधान पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें इजरायली और फिलिस्तीनी नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ 15 से अधिक देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसका उद्देश्य आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले ठोस सिफारिशें तैयार करना था, ताकि युद्धग्रस्त क्षेत्र में दो-राष्ट्र की संभावना को जीवित रखा जा सके। सम्मेलन एक साल पहले संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘न्यूयॉर्क घोषणा’ की वर्षगांठ पर हुआ, जिसने फिलिस्तीनी राज्य की दिशा में रोडमैप पेश किया था। [A1, A3, A5]
हालांकि, इस पहल को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं हैं। इतालवी टिप्पणीकारों ने इसे ‘भ्रम रहित संवाद’ करार देते हुए कहा कि फ्रांस की दृढ़ता सराहनीय है, पर जमीनी हकीकत बहुत अलग है। क्षेत्र अभी भी कई मोर्चों पर युद्ध की चपेट में है और दो-राष्ट्र लक्ष्य पहले से कहीं अधिक असंभव प्रतीत होता है। भाग लेने वाले शांति-समर्थक इजरायली और फिलिस्तीनी निस्संदेह साहसी हैं, लेकिन उनकी आवाज़ें कमज़ोर पड़ती दिख रही हैं। [A2]
बहरहाल, सम्मेलन के अंत में एक आठ-सूत्रीय ‘कार्रवाई का आह्वान’ जारी किया गया, जिसमें संघर्ष विराम, शासन सुधार, और गाजा के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल थे। इन सिफारिशों का लक्ष्य जी-7 देशों के नेताओं की चर्चाओं को दिशा देना है। वहीं, कूटनीतिक प्रयासों के समानांतर, सड़कों पर भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जकार्ता में अमेरिकी दूतावास के सामने 14 जून को एक विशाल फिलिस्तीन समर्थक रैली की घोषणा की गई है, जिसमें इस्लामिक संगठनों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। यह प्रदर्शन दिखाता है कि एशियाई मुस्लिम समुदायों में फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता कितनी गहरी है। [A4, A3]
विश्लेषकों का मानना है कि पेरिस सम्मेलन ने दो-राष्ट्र समाधान की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट किया, लेकिन इसका असर सीमित रह सकता है। इजरायली सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में हिंसा का चक्र और नागरिक हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे किसी भी शांति योजना पर संदेह गहराता है। फिर भी, फ्रांस और उसके सहयोगियों का प्रयास यह संकेत देता है कि पश्चिमी कूटनीति अभी भी इस मुद्दे को जीवित रखना चाहती है। अब सबकी निगाहें जी-7 शिखर सम्मेलन पर होंगी, जहाँ ये सिफारिशें नेताओं के सामने रखी जाएंगी। [A5, A1]
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
फ्रांस ने दो-राज्य समाधान पर दूसरे सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें इजरायली और फिलिस्तीनी नागरिक समाज एक साथ आए। फिर भी यह लक्ष्य कभी इतना दूर नहीं लगा, और आवाजें उठ रही हैं कि फिलिस्तीन की मान्यता को लोकतांत्रिक नवीनीकरण से जोड़ा जाए, यह देखते हुए कि वादा किए गए चुनाव नहीं हुए।
इजरायली और फिलिस्तीनी नागरिक समाज समूह पेरिस में मिल रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो-राज्य समाधान को न छोड़ने का आग्रह किया जा सके, जबकि चल रहे युद्ध के बीच संभावनाएं धुंधली हो रही हैं। न्यूयॉर्क घोषणा के एक साल बाद यह सम्मेलन युद्धविराम, शासन सुधार और गाजा पुनर्निर्माण का आह्वान जारी करेगा।
अमेरिकी दूतावास, जकार्ता के सामने फिलिस्तीन के बचाव में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रमुख इस्लामी नेता मुस्लिम एकता और मानवीय एकजुटता को मजबूत करने के लिए शामिल होंगे। विरोध प्रदर्शन में नौ मांगें प्रस्तुत की गई हैं, जो फिलिस्तीनी मुद्दे पर व्यापक आक्रोश और तात्कालिकता को दर्शाती हैं।
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