इज़राइल ने पूरे दक्षिणी लेबनान को 'युद्ध क्षेत्र' घोषित किया, बड़े पैमाने पर पलायन का आदेश
अप्रैल में घोषित संघर्षविराम के बावजूद, इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह से संघर्ष तेज़ करते हुए पूरे दक्षिणी लेबनान को खाली करने का पहला व्यापक आदेश दिया; 150 से अधिक ठिकानों पर हमले, बढ़ता विस्थापन और गहराता मानसिक स्वास्थ्य संकट।

इज़राइल ने बुधवार को एक साहसिक कदम उठाते हुए पूरे दक्षिणी लेबनान को "युद्ध क्षेत्र" घोषित कर दिया और वहाँ के सभी निवासियों को ज़हरानी नदी के उत्तर की ओर खाली हो जाने का आदेश दिया। यह इस साल अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित संघर्षविराम के बाद पहली बार इतना व्यापक निकासी आदेश है। इज़राइली सेना ने एक ही दिन में टायर, नबातिएह और बेका घाटी समेत पूरे दक्षिणी लेबनान में 150 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 56 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों हजारों लोग विस्थापित होने को मजबूर हुए। इज़राइली सेना के अनुसार, यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह द्वारा संघर्षविराम के बार-बार उल्लंघन के चलते की गई, जिसमें हिज़्बुल्लाह ने इज़राइली सैनिकों पर ड्रोन हमले किए और रोश हानिकरा व श्लोमी जैसे इज़राइली कस्बों को निशाना बनाया।
हालाँकि इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रस्तावित समझौते पर बातचीत चल रही है, और कुछ ही दिनों में वाशिंगटन में लेबनानी व इज़राइली प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता होने वाली है। लेकिन लेबनानी जनता में एक गहरा अवसाद और इस्तीफ़े की भावना घर कर गई है—बहुत कम लोग मानते हैं कि इन वार्ताओं से उनके देश में तत्काल शांति लौट आएगी। हिज़्बुल्लाह इज़राइली सेना की लेबनानी धरती पर मौजूदगी के ख़िलाफ़ लगातार हमले कर रहा है और इज़राइल की ओर रॉकेट दाग रहा है। एक रणनीतिक नदी के किनारे भीषण संघर्ष हुआ, जिसके बाद इज़राइली सेना और उत्तर की ओर बढ़ गई। इस सबके बीच, ईद-उल-अज़हा के मौके पर जारी किए गए निकासी आदेश ने स्थानीय आबादी के लिए त्योहार के दिनों को भय और अनिश्चितता में बदल दिया।
पाँच सप्ताह पहले शुरू हुए संघर्षविराम के बावजूद हिंसा थम नहीं रही। बेरूत के आसमान में इज़राइली ड्रोन की गूंज और लगातार हवाई हमलों ने नागरिकों को स्थायी भय में जीने को मजबूर कर दिया है। विस्थापित परिवार, स्कूल जाने से वंचित बच्चे और आत्महत्या की कोशिश कर चुकी महिलाएँ—यह संघर्ष लेबनान के मानसिक स्वास्थ्य संकट को गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक अस्थायी संघर्षविराम इस सामूहिक आघात को ठीक नहीं कर सकता जो बार-बार के उल्लंघनों के कारण और भी गहरा हो गया है।
इज़राइली सेना का कहना है कि वह "अत्यधिक बल" के साथ काम करने को मजबूर है क्योंकि हिज़्बुल्लाह संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। लेकिन संपूर्ण दक्षिणी लेबनान को युद्ध क्षेत्र घोषित करना और ज़मीनी कार्रवाई का विस्तार यह संकेत देता है कि यह संघर्ष जल्द ख़त्म होने वाला नहीं है। चाहे अमेरिका-ईरान के बीच कोई समझौता हो भी जाए, लेबनान में अब एक लंबे युद्ध के प्रति इस्तीफ़े का भाव पैदा हो चुका है। विस्थापन, मौतों और मनोवैज्ञानिक आघात का यह चक्र तब तक जारी रह सकता है जब तक राजनीतिक समाधान के साथ-साथ ज़मीनी हक़ीक़त नहीं बदलती।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Israel is ramping up operations against Hezbollah's terror infrastructure, hitting over 150 targets and ordering evacuations across southern Lebanon. U.S. limits on deep strikes hinder efforts to stop the expanding drone threat. The military is resolved to act forcefully despite international constraints.
Despite a ceasefire, Israel keeps bombarding southern Lebanon while declaring the whole region a combat zone. Civilians are exhausted and deeply traumatized, their mental health reaching breaking point as families remain displaced. Diplomacy looks futile, leaving people resigned to an endless war.
Israel declared all of southern Lebanon a combat zone, forcing hundreds of thousands to flee under heavy bombardment. The offensive resembles the worst phases of the war, killing dozens and pushing millions of civilians into exhaustion after nearly three years of conflict.
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