88 दिनों के बाद ईरान में इंटरनेट आंशिक रूप से बहाल, देशवासियों को मिली ‘क़ैद से रिहाई’ जैसी अनुभूति
लंबे अंधेरे के बाद मिली सीमित राहत, लेकिन सोशल मीडिया पर रोक और मोबाइल इंटरनेट का ठप होना बरकरार, भविष्य पर संशय

ईरान में 88 दिनों के दुनिया के सबसे लंबे राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद मंगलवार को आंशिक कनेक्टिविटी लौटी, लेकिन यह बहाली पूरी नहीं थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमलों के साथ शुरू हुआ यह शटडाउन जनवरी में हुए जन विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों की अगली कड़ी था। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के आदेश पर यह क़दम उठाया गया, हालांकि न्यायपालिका ने इसका विरोध किया और जिस निकाय ने निर्णय लिया था उसे निलंबित कर दिया। यूरोपीय निगरानी संगठनों ने चेतावनी दी कि लंबे व्यवधान के बाद हर बहाली अतीत की तुलना में कहीं अधिक कड़े नियंत्रण और सेंसरशिप के साथ आती है।
देश के भीतर और बाहर से आई प्रतिक्रियाओं में राहत और निराशा का मिश्रित भाव दिखा। तेहरान के एक टेक वर्कर ने कहा, “मुझे मिश्रित अनुभूति हो रही है; मैं ख़ुश हूँ, लेकिन साथ ही ख़ुद को बेवक़ूफ़ महसूस करता हूँ कि इतनी सी चीज़ पर ख़ुश हो रहा हूँ।” कई ईरानियों ने वीपीएन के सहारे सीमित पहुँच बनाई, लेकिन इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म अब भी पूरी तरह अवरुद्ध रहे। एक इंजीनियरिंग छात्र ने टेलीग्राम नोटिफिकेशन देखकर लिखा, “ज़िंदगी में कभी इतनी ख़ुशी नहीं हुई।” बीबीसी फ़ारसी ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी का हवाला देते हुए स्थिति को “एकांत कारावास से जेल के सामान्य वार्ड में आने” जैसा बताया। फ़ारसी भाषा के स्वतंत्र मीडिया ने इस अवधि को “फ़िल्टरनेट” की ओर वापसी कहा, जहाँ खुली दुनिया की जगह सीमित, नियंत्रित और निगरानी युक्त कनेक्टिविटी मिलती है।
नेटवर्क विश्लेषकों के अनुसार ट्रैफ़िक का स्तर 8 जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से पहले के स्तर से भी कम रहा और 27 जनवरी से 28 फरवरी के आंशिक बहाली के दौर से भी नीचे रहा। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता अमीर रशीदी ने रेडियो फ़र्दा से कहा कि इस डिजिटल अलगाव ने गहरे आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक घाव दिए हैं – कई लोगों ने नौकरियाँ खो दीं और व्यवसाय ठप हो गए। विश्लेषकों का मानना है कि हालाँकि कनेक्टिविटी बहाल हो गई है, पर यह स्थायी होगी या नहीं, इस पर संदेह है। सरकार नियंत्रण और राहत के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है, जबकि आम ईरानी तकनीकी हथकंडों से बाधाओं को पार करते हुए एक सतर्क आशा के साथ डिजिटल जीवन में लौट रहे हैं।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The partial restoration of the internet after 88 days is met with a mix of relief and bitterness. Many Iranians highlight the economic losses and psychological toll of the regime-imposed isolation, while strong doubts remain about the stability of the connection and the government's true intentions.
The partial reopening is seen as a limited and temporary move that does not ease censorship or restore full connectivity. The focus is on technical data showing traffic levels still below pre-protest figures, with warnings that another shutdown could follow.
The reactivation leaves many Iranians indifferent or disappointed, as they view internet access as a right that should never have been suspended. Emphasis is placed on the limited scope of the restoration and the normalization of an exceptional digital crackdown.
The partial reopening brings relief among Iranians, but also skepticism about its duration and the real freedom granted. Voices collected oscillate between joy at finally being able to communicate and awareness that censorship and control remain strong.
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