नई अल्जाइमर दवाओं पर उठे सवाल, पोषण ने दिखाई सीमित आशा
ब्रिटिश संगठन कोक्रेन की समीक्षा में लेकैनेमैब और डोनानेमैब का नैदानिक प्रभाव नगण्य पाया गया, जबकि मस्तिष्क सूजन जैसे ख़तरे बढ़े। वहीं भूमध्यसागरीय आहार से मनोभ्रंश के जोखिम में 10-20% कमी की संभावना दिखी।

अल्जाइमर रोग की नई पीढ़ी की दवाओं को लेकर उम्मीदों को एक बड़ी वैज्ञानिक समीक्षा ने झटका दिया है। ब्रिटिश साक्ष्य-आधारित संगठन कोक्रेन ने 20 हज़ार से अधिक रोगियों पर हुए परीक्षणों का विश्लेषण कर बताया कि लेकैनेमैब और डोनानेमैब जैसी एंटी-एमिलॉइड दवाएं मनोभ्रंश की गति धीमी करने में नगण्य नैदानिक लाभ देती हैं, जबकि मस्तिष्क में सूजन और रक्तस्राव जैसे गंभीर दुष्प्रभाव का जोखिम बढ़ा देती हैं।
हालांकि, इन परिणामों पर तीखी बहस छिड़ गई है। यूरोप और ब्रिटेन में ये दवाएं शुरुआती अल्जाइमर के लिए मंज़ूर हैं, और कई विशेषज्ञों ने कोक्रेन की इस समीक्षा की पद्धति पर सवाल उठाए हैं। ब्रिटिश धर्मार्थ संस्थाओं ने आरोप लगाया कि समीक्षा ने असफल और सफल परीक्षणों को अनुचित रूप से मिला दिया। नीदरलैंड्स के राडबाउड विश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजी प्रोफ़ेसर एडो रिचर्ड ने भी स्वीकार किया कि दवाओं का प्रभाव "या तो अनुपस्थित था या लगातार बहुत छोटा," लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि आंकड़ों को मिलाने से सकारात्मक संकेत छिप सकते हैं।
इस विवाद के बीच, एक दूसरा शोध पोषण के माध्यम से अल्जाइमर के जोखिम को कम करने की उम्मीद जगाता है। 'फ्रंटियर्स इन न्यूट्रीशन' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, भूमध्यसागरीय और MIND आहार—जिनमें सब्ज़ियों, जामुन, मेवों, साबुत अनाज और जैतून के तेल की भरपूर मात्रा हो—का पालन करने वालों में मनोभ्रंश का जोखिम 10 से 20 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया। हालांकि, नैदानिक परीक्षणों में स्मृति और सोच पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव मामूली और अक्सर संयोग के स्तर पर ही रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोहरा परिदृश्य अल्जाइमर जैसी जटिल बीमारी के लिए एकल समाधान की सीमाओं को दर्शाता है। जहाँ दवा उद्योग और कुछ विशेषज्ञ एमिलॉइड प्लाक को लक्ष्य करने वाली इन दवाओं को एक 'क्रांति' बता रहे थे, वहीं वास्तविक दुनिया के आंकड़े और स्वतंत्र समीक्षाएँ एक सतर्क तस्वीर पेश करती हैं। दूसरी ओर, पोषण और जीवनशैली के हस्तक्षेपों से सुरक्षित और सुलभ विकल्पों की संभावना बनती है, भले ही उनका असर तत्काल नाटकीय न हो।
आने वाले वर्षों में अल्जाइमर के इलाज की दिशा शायद इन दोनों दृष्टिकोणों—दवाओं और आहार—के संयोजन, या बीमारी को कई कोणों से समझने पर निर्भर करेगी। कोक्रेन समीक्षा ने नियामकों और चिकित्सकों के सामने यह चुनौती रख दी है कि क्या अपेक्षाकृत मामूली लाभ के लिए गंभीर जोखिम उठाना उचित है। साथ ही, पोषण अनुसंधान संकेत देता है कि व्यक्तिगत और जनस्वास्थ्य स्तर पर रोकथाम पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
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