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बाल श्रम के खिलाफ ‘रेड कार्ड’ की गूंज, 13.8 करोड़ बच्चों का बचपन अब भी ख़तरे में

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर संयुक्त राष्ट्र ने चेताया कि 13.8 करोड़ बच्चे श्रम में लिप्त हैं, जबकि अफ्रीका से लेकर यूरोप तक सरकारों और संगठनों ने इसके उन्मूलन का संकल्प दोहराया।

समाज8 स्रोत5 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 22:27

दुनियाभर में बाल श्रम के खिलाफ आवाजें एक बार फिर बुलंद हुईं, जब शुक्रवार को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया गया। इस वर्ष का विषय—“रेड कार्ड टू चाइल्ड लेबर: फेयर प्ले फॉर चिल्ड्रन, डिसेंट वर्क फॉर एडल्ट्स”—बच्चों के अधिकारों और उनके सुरक्षित बचपन की हिमायत करता है। संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया कि करीब 13.8 करोड़ बच्चे अभी भी बाल श्रम के जाल में फंसे हैं, जिनमें 5.4 करोड़ खतरनाक काम करने को मजबूर हैं [A3]। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनिसेफ जैसी संस्थाएं लगातार इस चुनौती के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग कर रही हैं। नाइजीरिया की प्रथम महिला ओलुरेमी टिनुबू ने भी ‘रेड कार्ड’ दिखाने की अपील करते हुए कहा कि कोई भी बच्चा जबरन श्रम के कारण शिक्षा और विकास के अवसरों से वंचित नहीं रहना चाहिए [A2]।

अफ्रीका के कई देशों में इस दिवस पर ठोस पहलें सामने आईं। मोरक्को में राष्ट्रीय बाल अधिकार वेधशाला ने “ला तशगील अल-अतफाल” (बाल श्रम को ना) के नारे के साथ व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया, जिसे राजकुमारी लल्ला मरियम का संरक्षण प्राप्त है [A1]। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में यह खतरा काफी कम हुआ है। वहीं, घाना में एहाफो क्षेत्रीय पुलिस कमांडर ने कोको की खेती वाले इलाकों में बाल श्रम के मामलों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी [A4] और मानवाधिकार आयोग (सीएचआरएजे) ने इसे राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती बताया [A7]। लेकिन अल्जीरिया की तस्वीर दोहरे चेहरे वाली है—श्रम मंत्री ने 72,000 निजी प्रतिष्ठानों की जांच में महज 2 मामले पाए जाने की बात कही, जबकि आलोचक इसे असंगठित क्षेत्र की अनदेखी का नतीजा बताते हैं, जहां हकीकत कहीं ज्यादा भयावह है [A6]।

यूरोप भी इस समस्या से अछूता नहीं है। इटली में ‘सेव द चिल्ड्रन’ के अनुसार, 7 से 15 साल के हर 15 बच्चों में से एक किसी न किसी रूप में श्रम का शिकार है, अक्सर परोक्ष तरीके से [A5]। ईरान से आई आवाजें तो सवाल खड़ा करती हैं कि क्या सिर्फ सड़कों पर काम करने वाला बच्चा ही बचपन से वंचित है, या हर वह बालक जो बड़ों की महत्वाकांक्षाओं का साधन बन जाता है, अपनी पहचान और सुरक्षा खो देता है [A8]।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम का उन्मूलन केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच और असंगठित क्षेत्र पर सख्त निगरानी से संभव है। मोरक्को जैसे देशों में सकारात्मक गिरावट के बावजूद, वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि महामारी और आर्थिक झटकों ने लाखों बच्चों को फिर से कमजोर बना दिया है। अगली पीढ़ी के लिए ‘रेड कार्ड’ तभी सार्थक होगा जब सरकारें, उद्योग और समाज मिलकर बच्चों को क्लासरूम और खेल के मैदानों में वापस लाने का संकल्प लें।

एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa arabo levante-MaghrebStampa africana subsaharianaStampa europea continentale
Stampa arabo levante-Maghrebscetticismoindignazione

In the Arab Levant-Maghreb bloc, the narrative is twofold: on one hand, the Moroccan royal campaign is presented as a solemn commitment against child labour; on the other, an Algerian analysis denounces the gap between official rhetoric and ground reality, accusing authorities of smoke and mirrors. A tension emerges between celebration of institutional initiatives and skepticism about their effectiveness.

Stampa africana subsaharianaallarmeurgenza

In sub-Saharan Africa, voices are unanimous in condemning child labour as a scourge that deprives millions of children of education and safety. The Nigerian first lady raises a red card, the police in Ghana threatens legal action, and the human rights commission calls for renewed global commitment. The tone is one of urgency and alarm, with direct appeals for immediate action.

Stampa europea continentaleallarmeindignazione

In continental Europe, the focus is on the domestic reality: in Italy, it is estimated that nearly one in 15 minors is involved in child labour, often underreported. The emphasis is on the violation of fundamental rights and the lasting impact on children's growth and health. The tone is critical but analytical, urging not to underestimate the phenomenon even in developed countries.

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Adom Online12 जून, 11:47
Iran International12 जून, 17:22
Premium Times12 जून, 17:22
Joy Online12 जून, 17:26
Capital Group News12 जून, 19:25
Hespress12 जून, 17:23
Le Matin d'Algérie12 जून, 10:47
Adnkronos12 जून, 11:47