अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत: भारत में कमजोर मानसून, कोलंबिया में पानी-बिजली बचाने की सलाह
प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने से भारत में मानसून कमजोर रह सकता है, वहीं कोलंबिया सरकार ने जल और ऊर्जा बचाने की अपील की है।

अमेरिकी एजेंसी नोआ ने 11 जून को घोषणा की कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने भी पुष्टि की है कि मध्य और पूर्वी प्रशांत में समुद्री सतह का तापमान निर्धारित सीमा पार कर चुका है और वायुमंडल ने भी इसकी प्रतिक्रिया दी है। स्वीडन के एसएमएचआई के अनुसार यदि तापमान सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस अधिक रहा तो इसके 'सुपर अल नीनो' में बदलने की 63 प्रतिशत संभावना है। इसके चलते दुनियाभर में अतिवृष्टि, बाढ़, सूखा और जंगल की आग जैसी चरम मौसमी घटनाओं की आशंका है।\n\nभारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। आईएमडी ने पहले ही इस वर्ष के मानसून के पूर्वानुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 प्रतिशत कर दिया था, जो पहले 92 प्रतिशत था। जून-सितंबर के मानसून सीजन के दौरान मध्यम से मजबूत अल नीनो की स्थिति बने रहने की संभावना है। साथ ही हिंद महासागर डिपोल के तटस्थ रहने से वर्षा पर और प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इतिहास बताता है कि अल नीनो के वर्षों में भारत को कमजोर मानसून, ऊंचे तापमान और कई बार सूखे का सामना करना पड़ता है, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है।\n\nकोलंबिया ने तो स्थिति को और गंभीरता से लिया है। वहां सरकार ने बताया कि अल नीनो अनुमान से करीब तीन महीने पहले आ गया है और यह 1950 के बाद के सबसे तीव्र प्रकरणों में से एक हो सकता है। जलविज्ञान, मौसम विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन संस्थान (आईडिएम) के अनुसार वर्ष की दूसरी छमाही में इसके और मजबूत होने का अनुमान है। सरकार ने जल और ऊर्जा बचाने की अपील करते हुए आपूर्ति, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए निवारक उपाय शुरू कर दिए हैं।\n\nविशेषज्ञों का मानना है कि यह अल नीनो वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड स्तर तक ले जा सकता है, जिसका प्रभाव 2027 तक रहने की संभावना है। इससे खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ेगा। जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दुनिया को चरम मौसम की घटनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि समुद्र के गर्म होने का यह चक्र अभी अपनी चरम सीमा पर नहीं पहुंचा है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
भारत के मौसम विभाग ने पुष्टि की है कि अल नीनो आ चुका है और मानसून के दौरान और तीव्र होगा, जिससे औसत से कम वर्षा, लंबे शुष्क दौर और अधिक तापमान की संभावना है। इस घटना से 'सुपर अल नीनो' की आशंका पैदा हो गई है, जो कृषि और जल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
अल नीनो आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है और तेज़ी से तीव्र हो रहा है; वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह अब तक का सबसे शक्तिशाली घटनाक्रम बन सकता है। यह घटना दुनिया भर में चरम मौसम—लू, बाढ़, सूखा और जंगल की आग—फैलाएगी, जिससे खाद्य आपूर्ति, जल संसाधन और आर्थिक स्थिरता को ख़तरा होगा।
कोलंबिया सरकार ने अल नीनो के समय से पहले आगमन की पुष्टि की है, जो 1950 के बाद सबसे तीव्र प्रकरणों में से एक हो सकता है। अधिकारी जनता से पानी और बिजली बचाने का आह्वान कर रहे हैं, साथ ही कृषि, पारिस्थितिकी तंत्र और ऊर्जा प्रणाली की रक्षा के लिए निवारक कदम उठा रहे हैं।
भारत का मौसम विभाग पूरे मानसून के दौरान मध्यम से तीव्र अल नीनो स्थितियों का अनुमान लगा रहा है, जबकि तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव से राहत की संभावना कम है। यह परिदृश्य दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में मानसून वर्षा और फ़सलों को लेकर चिंताएँ बढ़ा रहा है।
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