डीपफेक घोटाले से लेकर ड्रग सिंडिकेट तक: एशिया में अंतरराष्ट्रीय अपराध का फैलता जाल
सिंगापुर में प्रधानमंत्री की डीपफेक जूम मीटिंग से 49 लाख सिंगापुर डॉलर की ठगी; वहीं श्रीलंका साइबर ठगों का नया अड्डा बन रहा है और भारत में मानव तस्करी व ड्रग नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

सिंगापुर पुलिस ने एक ऐसे एआई-जनित जूम वीडियो कॉन्फ्रेंस का फुटेज हासिल किया है, जिसके जरिये प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और मंत्री इंद्राणी राजा की डीपफेक प्रतिरूपों का इस्तेमाल कर करोड़ों डॉलर की ठगी की गई। पीड़ितों को एक जालसाज ने व्हाट्सएप पर कैबिनेट सचिव बनकर प्रधानमंत्री के साथ बैठक का निमंत्रण भेजा। डीपफेक तकनीक से तैयार इन फर्जी कांफ्रेंस में उन्हें निजी क्षेत्र के भागीदार के रूप में पेश किया गया और बाद में एक फर्जी वकील ने संपर्क कर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी फंडिंग सहायता’ के नाम पर धन हस्तांतरण कराया। एक मामले में पीड़ित ने कम से कम 49 लाख सिंगापुर डॉलर (करीब 38 लाख अमेरिकी डॉलर) गंवा दिए।
इस बीच, कंबोडिया और म्यांमार में सख्त कार्रवाई के बाद साइबर ठग गिरोह अब श्रीलंका को अपना नया अड्डा बना रहे हैं। सस्ती वीज़ा व्यवस्था और तेज़ इंटरनेट के चलते यह द्वीप विदेशी जालसाजों को आकर्षित कर रहा है, जहाँ साल की शुरुआत से अब तक चीन, वियतनाम और भारत के एक हज़ार से अधिक संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं। ये गिरोह लक्ज़री विला से लेकर कार्यालय परिसरों तक में संचालित हो रहे हैं और दक्षिण-पूर्व एशिया में दबाव बढ़ने के साथ ही श्रीलंका को ऑनलाइन अपराध का केंद्र बनाते जा रहे हैं।
भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय अपराध तंत्र से अछूता नहीं है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और ‘साइबर गुलामी’ मामले में पांच लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। गिरोह का कथित सरगना आनंद कुमार सिंह हर व्यक्ति को फर्जी कंपनियों में भेजने के लिए 2,000 से 3,000 डॉलर वसूलता था, और युवाओं को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर ठगी के अड्डों तक पहुँचाया जाता था। वहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने भारत-म्यांमार सीमा पर संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के सरगना थाचिनतुआंग को दिल्ली से गिरफ्तार किया है, जो मेथामफेटामाइन और हेरोइन की प्रमुख आपूर्ति करता था।
ये घटनाएँ अलग-अलग होते हुए भी एशिया में संगठित अपराध के बदलते चेहरे को दर्शाती हैं—जहाँ डीपफेक जैसी उच्च तकनीक से लेकर पारंपरिक मादक पदार्थ तस्करी तक, सभी गिरोह एक-दूसरे से जुड़े नेटवर्क की तरह विकसित हो रहे हैं। एक ओर कड़ी कार्रवाई इन्हें नये इलाकों में धकेल रही है, तो दूसरी ओर कमजोर सीमाएँ और डिजिटल बुनियादी ढाँचा इनके पनपने का माध्यम बन रहे हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे ख़तरों से निपटने के लिए देशों के बीच सूचना साझेदारी और सक्रिय जाँच का समन्वय पहले से कहीं अधिक ज़रूरी होगा।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Police uncovered a deepfake scam involving impersonation of senior Singapore government officials via a fake Zoom meeting. Victims were lured through WhatsApp messages and attended a fraudulent video conference. The case underscores a new dimension of organized crime.
A former merchant navy captain was arrested for trafficking Indian youths to Cambodia, where they were forced into cyber slavery. The NIA filed a chargesheet against five individuals, exposing a human trafficking network that charged thousands of dollars per victim.
A victim in Singapore lost US$3.8 million in a deepfake Zoom scam impersonating the Prime Minister. Meanwhile, investigations reveal that criminal gangs, fleeing crackdowns in Cambodia and Myanmar, are establishing new bases in Sri Lanka using cheap visas and fast internet.
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