बेलफास्ट: चाकू हमले के बाद दंगे, हमले की सूची पहले से थी पुलिस के पास
सूडानी शरणार्थी द्वारा एक व्यक्ति पर किए गए चाकू हमले ने बेलफास्ट में जातीय हिंसा को जन्म दिया। पीड़ित की आंख चली गई; पुलिस को पहले से 'हमले की सूची' की जानकारी थी।

सोमवार 8 जून को बेलफास्ट की सड़कों पर एक दिल दहला देने वाली घटना ने शहर को हिला कर रख दिया। सूडान के 30 वर्षीय हादी अलोदिद ने 40 वर्षीय स्टीफन ओगिल्वी पर रसोई के चाकू से हमला कर दिया। हमले में ओगिल्वी की एक आंख चली गई और उनकी जान बाल-बाल बची। अलोदिद 2023 में पेरिस होते हुए बेलफास्ट पहुंचा था और उसे बिना किसी साक्षात्कार के त्वरित प्रक्रिया के तहत शरण दे दी गई थी। इस हमले की भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई, जिसने शहर में दशकों बाद फिर से सांप्रदायिक हिंसा की चिंगारी भड़का दी।
हालांकि, जांच से पता चला कि यह हिंसा पूरी तरह सहज नहीं थी। स्थानीय स्वयंसेवी समूहों ने नवंबर 2025 से ही पुलिस को चेतावनी दी थी कि दक्षिणपंथी समूह ऑनलाइन 'हमले की सूची' साझा कर रहे हैं, जिसमें प्रवासियों के आवासों के पते शामिल थे। इन्हीं पतों पर बाद में हमले हुए। यूरोपीय मीडिया ने इस ओर इशारा किया कि किस तरह एलन मस्क जैसे प्रभावशाली लोगों ने सोशल मीडिया पर नस्लवादी भावनाओं को हवा दी। विरोध प्रदर्शन बेलफास्ट से निकलकर ब्रिटेन के अन्य शहरों तक फैल गए, जहां पहले से 'व्हाइट लाइव्स मैटर' के नारे गूंज रहे थे।
हिंसा का सबसे गहरा असर आप्रवासी समुदायों पर पड़ा। सूडान से 2016 में आए तवसुल मोहम्मद ने बताया, "महिलाएं और बच्चे दहशत में हैं। मैंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।" शहर में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बसें रोक दी गईं, दुकानें बंद हो गईं और स्कूलों ने समय से पहले ही छुट्टी कर दी। पुलिस को जल तोपों का इस्तेमाल करना पड़ा और दमकल विभाग ने 62 से अधिक आग की घटनाओं पर काबू पाया। राजनीतिक बहस में अलोदिद की शरण प्रक्रिया पर सवाल उठे, जबकि अमेरिकी मीडिया ने यूरोपीय प्रेस पर हमलावर की पृष्ठभूमि को दबाने का आरोप लगाया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट उत्तरी आयरलैंड में बढ़ते जातीय तनाव और सोशल मीडिया के दुरुपयोग का परिणाम है। हालांकि तत्काल हिंसा रुक गई है, लेकिन नफरत फैलाने वाले नेटवर्क सक्रिय हैं और पीड़ितों में भय व्याप्त है। स्थानीय प्रशासन अब ऑनलाइन घृणा अभियानों को नियंत्रित करने और सांप्रदायिक सौहार्द बहाल करने की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
एक सूडानी शरणार्थी द्वारा किए गए क्रूर चाकू हमले ने बेलफास्ट में अप्रवासी विरोधी दंगे भड़का दिए। दक्षिणपंथी प्रभावशाली लोगों और सोशल मीडिया ने हिंसा को हवा दी, जबकि पुलिस को पहले से ही अप्रवासियों के पतों की लक्ष्य सूची की चेतावनी मिली थी। शहर भय और नस्लवाद तथा ऑनलाइन हेरफेर पर तीखी बहस की चपेट में है।
अप्रवासियों के खिलाफ हिंसा बेलफास्ट में भय फैला रही है। एक चाकू हमले के बाद जिसमें एक सूडानी व्यक्ति पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया, नकाबपोश समूहों ने अप्रवासी समझे जाने वाले लोगों के घरों और व्यवसायों को निशाना बनाया। सूडानी शरणार्थियों सहित अल्पसंख्यक जातीय समुदायों का कहना है कि महिलाएं और बच्चे भयभीत और सदमे में हैं, घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं।
बेलफास्ट इसलिए जल रहा है क्योंकि एक सूडानी 'शरणार्थी' ने एक स्थानीय व्यक्ति का सिर काटने का प्रयास किया, जिससे वह अंधा हो गया। मीडिया सच बताने से इनकार कर रहा है, आप्रवासन के संबंध को छिपा रहा है। लोगों ने विफल शरण नीतियों और मीडिया की बेईमानी के खिलाफ दंगे किए।
बेलफास्ट के दंगे, जो एक सूडानी शरणार्थी के हमले से भड़के, तेजी से ऑस्ट्रेलिया की राजनीतिक बहस में शामिल हो गए। एक सीनेटर ने तर्क दिया कि यह दिखाता है कि ऑस्ट्रेलिया को इस बात की अधिक जांच करनी चाहिए कि किसे देश में आने दिया जाए। इस घटना को ऑस्ट्रेलिया के प्रवासन मॉडल के लिए एक परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो दूरस्थ अशांति की घरेलू नीति के लिए प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
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