यूरोपीय संघ का नया प्रवासन समझौता लागू, सीमाओं पर सख्ती और विवाद
12 जून 2026 से लागू पैक्ट में त्वरित स्क्रीनिंग, बंदीकरण और एकजुटता तंत्र शामिल हैं, लेकिन मानवाधिकार समूह इसे ICE मॉडल से तुलना कर रहे हैं।

12 जून 2026 को यूरोपीय संघ का बहुप्रतीक्षित प्रवासन और शरण पैक्ट लागू हो गया। नौ विनियमों और एक निर्देश पर आधारित यह सुधार पैकेज 2015 के शरणार्थी संकट के बाद से लंबी बातचीत का परिणाम है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अवैध प्रवासन और शरण प्रक्रियाओं को एक समान बनाना है। अब सभी आगमनों की सीमा पर गहन स्क्रीनिंग होगी, उंगलियों के निशान लिए जाएंगे और सुरक्षित देशों की एक साझा सूची बनाई जाएगी। साथ ही, एक अनिवार्य एकजुटता तंत्र के तहत शरणार्थियों का बोझ सभी देशों में बांटा जाएगा।
हालांकि, यह पैक्ट सभी देशों में एक समान रूप से लागू नहीं हो पाया है। स्वीडन की राष्ट्रीय विधायिका अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, जिससे "कानूनी पेचीदगी" पैदा हो रही है [A2]। जर्मनी में विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अनियमित प्रवासन में कमी आ सकती है, लेकिन यह पूर्ण विराम नहीं लगाएगा [A3]। इटली सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मेलोनी, इसे अपनी अल्बानिया मॉडल की जीत बता रही है, जहां शरण केंद्र स्थापित करने की योजना थी [A5]। विदेश मंत्री तायानी ने कहा कि "आखिरकार यूरोप ने अवैध आव्रजन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है" [A5]। लेकिन मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल आलोचना कर रहे हैं: यूरोपीय सांसद चेचिलिया स्ट्राडा ने इसे "बेहद चिंताजनक दौर" बताते हुए अमेरिकी आईसीई (आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन) मॉडल की याद दिलाई [A10]। पैक्ट में त्वरित प्रक्रियाएं, कम गारंटियां और व्यापक रूप से बंदीकरण का प्रावधान है, यहां तक कि नाबालिगों को भी हिरासत में रखा जा सकता है [A4]।
यह पैक्ट सिर्फ यूरोपीय नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि रूस जैसे तीसरे देशों के नागरिकों के लिए भी अहम है। रूसी नागरिकों की शरण याचिकाओं पर अब त्वरित प्रक्रिया के तहत विचार होगा और अस्वीकृति की स्थिति में उन्हें किसी "सुरक्षित तीसरे देश" में निर्वासित किया जा सकता है [A6]। दूसरी ओर, फ्रोंटेक्स के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2026 के पहले पांच महीनों में समुद्री मार्गों से अवैध प्रवेश पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40% घट गए हैं [A11]। विशेषज्ञ इसके लिए तीसरे देशों के साथ सहयोग और कड़े नियंत्रण को श्रेय दे रहे हैं, लेकिन चेतावनी भी देते हैं कि पैक्ट स्थायी समाधान नहीं है [A3]।
आगे की राह: अगले सप्ताह यूरोपीय संसद की पूर्ण बैठक में वापसी विनियमन पर अंतिम मतदान होगा, जिसमें 24 महीने तक हिरासत की अनुमति होगी और तीसरे देशों में वापसी केंद्र स्थापित करने की संभावना होगी [A16]। आलोचकों का कहना है कि इससे हिरासत का दायरा और बढ़ेगा तथा मानवाधिकारों का हनन होगा [A15]। यूरोपीय संघ की प्रवासन नीति एक नए अध्याय में प्रवेश कर रही है, जहां सीमाएं अब केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि व्यक्तियों का पीछा करने वाली संकल्पनाएं बन गई हैं [A10]।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
नया यूरोपीय संघ प्रवासन और शरण समझौता अधिकारों में कटौती का प्रतीक है: त्वरित प्रक्रियाएं, व्यापक हिरासत, जिसमें नाबालिग भी शामिल हैं, और अमेरिकी ICE जैसी सुरक्षा सोच पर आधारित मॉडल। यूरोप सुरक्षा चाहने वालों के लिए जेल बनता जा रहा है, जहां प्रणाली वापसी और निवारण को प्राथमिकता देती है।
वर्षों की बातचीत का परिणाम, यूरोपीय प्रवासन और शरण समझौता, 27 सदस्य देशों के बीच प्रक्रियाओं में सामंजस्य लाने और पिछली प्रणाली की विफलताओं को दूर करने के लिए लागू हुआ है। नए नियम सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और आवेदन प्रसंस्करण में तेजी लाने का लक्ष्य रखते हैं, ऐसे माहौल में जहां जनता की राय तेजी से प्रतिबंधात्मक हो रही है।
जब यूरोपीय संघ अपना नया प्रवासन समझौता लागू कर रहा है, रूस यूरोपीय राजनयिकों के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठा रहा है, सीमा पार करने के लिए अधिसूचना आवश्यकता लागू कर रहा है। फ्रोंटेक्स डेटा समुद्र के रास्ते अनियमित आगमन में गिरावट दिखाता है, लेकिन मॉस्को प्रतिबंधों का जवाब देने और प्रवाह प्रबंधन में अपनी संप्रभुता पर जोर देता है।
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