यूक्रेन के लिए 'एसोसिएट' ईयू सदस्यता अनुचित, पूर्ण सदस्यता पर ज़ोर: ज़ेलेंस्की
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने जर्मन चांसलर के प्रस्ताव को अनुचित बताया, जबकि स्लोवाकिया ने कीव की तैयारी पर सवाल उठाए। पूर्वी यूरोप में विरोध और ओरबान के हटने से नई संभावनाएं।

राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने शुक्रवार देर रात यूरोपीय संघ के नेताओं को भेजे एक पत्र में जर्मनी के उस प्रस्ताव को “अनुचित” करार दिया जिसमें यूक्रेन को बिना मतदान अधिकार के “एसोसिएट” सदस्यता देने की बात कही गई थी। रॉयटर्स द्वारा समीक्षित इस पत्र में ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ में उपस्थित रहते हुए खामोश रहना अनुचित होगा और अब पूर्ण तथा सार्थक सदस्यता की ओर बढ़ने का सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले महीने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान—जो यूक्रेन की सदस्यता के कट्टर विरोधी रहे हैं—के चुनावी पराजय के बाद हटने से सदस्यता वार्ता में ठोस प्रगति का अवसर बना है। [A1, A4]
यह विवाद तब शुरू हुआ जब जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मेर्ज़ ने सुझाव दिया कि यूक्रेन को पूर्ण सदस्यता की लंबी प्रक्रिया के दौरान एक अंतरिम कदम के रूप में यूरोपीय संसद और आयोग की बैठकों में बिना मतदान के भाग लेने की अनुमति दी जाए, ताकि रूसी आक्रमण से शुरू हुए चार साल पुराने युद्ध को समाप्त करने में मदद मिल सके। ज़ेलेंस्की ने इस विचार को ठुकराते हुए शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूक्रेन अपने जीवन, स्वतंत्रता और उस यूरोप के लिए लड़ रहा है जो सबसे लंबे समय तक शांति में रहा है—इसलिए उसे पूर्ण सदस्यता मिलनी ही चाहिए। [A2, A6]
हालांकि मध्य यूरोप से प्रतिरोध के स्वर अभी भी मुखर हैं। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फ़ित्सो ने साफ कहा कि यूक्रेन फिलहाल यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि बदले में कीव संगठन को क्या दे सकता है और याद दिलाया कि मोंटेनेग्रो, अल्बानिया और खासकर सर्बिया जैसे देश वर्षों से “आत्मघाती राजनीतिक सुधार” कर रहे हैं। फ़ित्सो ने चेतावनी दी कि कहीं ब्रसेल्स इन उम्मीदवारों को दरकिनार कर यूक्रेन को अविश्वसनीय लाभ न दे दे। इससे पहले यूक्रेन की पूर्व राष्ट्रपति सचिव यूलिया मेंडल ने भी कहा था कि ज़ेलेंस्की किसी “दोयम दर्जे” की सदस्यता स्वीकार नहीं करेंगे। [A3]
ओरबान के जाने से यूक्रेन के समर्थकों को एक बड़ी रुकावट दूर होती दिखती है, लेकिन फ़ित्सो का रुख दर्शाता है कि मध्य यूरोपीय देशों में संदेह बरकरार है। जर्मनी का प्रस्ताव एक व्यावहारिक समझौते की कोशिश है, जबकि ज़ेलेंस्की इसे अपर्याप्त मानते हुए यूरोप की रक्षा का तर्क दे रहे हैं। आगे की राह में पश्चिमी बाल्कन के उम्मीदवार देशों की नाराजगी और यूक्रेन की त्वरित सदस्यता की मांग के बीच यूरोपीय संघ को एक नाजुक संतुलन साधना होगा, जिससे यह प्रक्रिया आने वाले महीनों में और अधिक जटिल हो सकती है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Eastern European press covers Zelenskyy's reaction to Merz's proposal, emphasizing that Ukraine deserves full EU membership for its sacrifice in defending Europe. The tone is measured, but there is some disappointment with the German proposal, seen as a step back from Ukrainian expectations.
Russian state media highlights internal Ukrainian criticism of Zelenskyy, citing historians and politicians who accuse him of rejecting a reasonable proposal and using the country as a shield for Europe. The tone is strongly critical, with indignation towards Ukrainian leadership, and emphasizes the stalemate in the EU accession process.
Israeli press reports the news neutrally, focusing on Zelenskyy's letter and Merz's proposal. The tone is detached, with an emphasis on procedural implications and potential impact on peace negotiations. No strong stance emerges, but there is interest in diplomatic developments.
Latin American press reports the news with a critical but measured tone, highlighting Zelenskyy's rejection of the German proposal. Ukraine's demand for equal rights in the EU is emphasized, but skepticism about actual membership prospects also emerges. The focus is on geopolitical dynamics and tensions between Ukraine and Germany.
यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ
7 स्रोत · 4 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की