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हिंद महासागर की गहराइयों में मिला 53 लाख साल पुराना व्हेल कब्रिस्तान

हिंद महासागर की डायमंटीना भ्रंश क्षेत्र में 7,000 मीटर गहराई पर खोजा गया यह विशाल व्हेल कब्रिस्तान 53 लाख वर्ष पुराने जीवाश्मों और सक्रिय पारिस्थितिकी तंत्रों को समेटे हुए है।

स्वास्थ्य और विज्ञान6 स्रोत3 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 13:49

हिंद महासागर के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित डायमंटीना भ्रंश क्षेत्र की अंधेरी गहराइयों ने एक ऐसा रहस्य उजागर किया है जिसने वैज्ञानिकों को अचंभित कर दिया है। यहाँ समुद्र तल से लगभग 7,000 मीटर नीचे, 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैला हुआ, दुनिया का सबसे गहरा और विशाल व्हेल कब्रिस्तान मिला है। इस स्थल पर 470 से अधिक जीवाश्म स्थल और पाँच सक्रिय व्हेल शव पाए गए हैं, जिनमें से कुछ जीवाश्म 53 लाख वर्ष पुराने हैं। यह खोज न केवल अपने पैमाने के लिए बेजोड़ है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि लाखों वर्षों से व्हेलें मरने के लिए इसी स्थान पर आती रही हैं।\n\nइस अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान का नेतृत्व चीनी विज्ञान अकादमी के गहरे समुद्र विज्ञान और इंजीनियरिंग संस्थान (आईडीएसएसई) ने किया, जो हाइनान प्रांत के सान्या शहर में स्थित है। इसमें इटली की पीसा विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानियों और न्यूजीलैंड की अर्थ साइंसेज न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया। अध्ययन को प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर में प्रकाशित किया गया, जिसने तुरंत वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान खींचा। इतालवी शोधकर्ताओं ने इस स्थल को “व्हेलों का कब्रिस्तान” (नेक्रोपोली) करार दिया, जबकि चीनी टीम ने इसे पृथ्वी के सबसे गहरे और व्यापक व्हेल जीवाश्म संचय के रूप में रेखांकित किया।\n\nयह खोज गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। जब एक व्हेल मरकर समुद्र तल पर गिरती है, तो उसका शव एक संपूर्ण आवास बन जाता है—जिसे “व्हेल फॉल” कहते हैं—जो विशिष्ट जीवों को पोषण देता है। इस स्थल पर मौजूद प्राचीन जीवाश्म और आधुनिक शव यह दर्शाते हैं कि यह प्रक्रिया कम से कम 53 लाख वर्षों से निरंतर चल रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक और समुद्री परिस्थितियों ने इसे व्हेलों के लिए एक प्राकृतिक मृत्यु स्थल बना दिया है, जिससे अत्यंत गहराई में जैव विविधता के विकास का अध्ययन किया जा सकता है।\n\nइस खोज ने गहरे समुद्र की सीमाओं और वहाँ जीवन के फलने-फूलने की हमारी समझ को नया आकार दिया है। चीनी शोधकर्ताओं के अनुसार, यह निष्कर्ष उन सीमाओं को फिर से परिभाषित करते हैं जिनके बारे में हम सोचते थे कि गहरे समुद्र में जीवन कहाँ और कैसे पनप सकता है। लैटिन अमेरिकी मीडिया ने इस खोज को “वैज्ञानिकों को असमंजस में डालने वाली” बताया, जो इसकी अप्रत्याशितता को रेखांकित करता है। भविष्य में, यह स्थल गहरे समुद्र के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला के रूप में काम कर सकता है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यहाँ से मिले आँकड़े न केवल व्हेलों के विकास बल्कि संपूर्ण अगाध पारिस्थितिकी तंत्र की कहानी बयाँ करेंगे।

एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।

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Stampa europea continentale/ mediterraneadistaccopragmatismo

पीसा विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानियों सहित एक अंतरराष्ट्रीय दल ने हिंद महासागर के डायमेंटिना भ्रंश क्षेत्र में सबसे बड़ा और सबसे गहरा व्हेल कब्रिस्तान खोजा है। इस स्थल पर हाल की व्हेल शवों के साथ-साथ 50 लाख वर्ष से भी पुराने सीटेशियन जीवाश्म मौजूद हैं, जो गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में अभूतपूर्व झरोखा प्रदान करते हैं। नेचर में प्रकाशित यह अध्ययन गहरे समुद्री जीवन की समझ में एक बड़ी प्रगति है।

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चीनी गहरे समुद्र अनुसंधान दल ने पृथ्वी का सबसे गहरा और सबसे विस्तृत व्हेल जीवाश्म स्थल खोज निकाला है, जिससे पता चलता है कि व्हेल 50 लाख से अधिक वर्षों से हिंद महासागर के इस स्थान पर मरने आती रही हैं। नेचर में प्रकाशित यह खोज गहरे समुद्र अन्वेषण में चीन की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करती है और दीर्घकालिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र विकास में एक अनूठी खिड़की प्रदान करती है।

Stampa latinoamericana/ mercatodistaccopragmatismo

एक ऐसी खोज जिसने वैज्ञानिकों को चकित कर दिया: हिंद महासागर की गहराइयों में एक विशाल व्हेल कब्रिस्तान पाया गया, जिसमें 53 लाख वर्ष पुराने जीवाश्म मौजूद हैं। यह स्थल 1,200 किलोमीटर तक फैला है और 7,000 मीटर की गहराई पर स्थित है, जो दर्शाता है कि महासागर अब भी ऐसे रहस्य छिपाए हुए हैं जो विशेषज्ञों को भी हैरान कर सकते हैं।

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6 स्रोत · 3 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की

Excelsior12 जून, 04:54
Wired Italia12 जून, 06:57
South China Morning Post (SCMP)12 जून, 03:28
The News Lens12 जून, 05:56
Los Andes12 जून, 02:28
CNN Brasil12 जून, 10:46