ट्रंप-नेतन्याहू मतभेद और लेबनान संकट: युद्धविराम की धुंध में मध्य पूर्व
ईरान की मिसाइलों और इज़रायली हवाई हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति व इज़रायली प्रधानमंत्री के बीच रणनीतिक दरार उभरी; लेबनान में हिज़्बुल्लाह से जंग जारी

मध्य पूर्व फिर एक बार बड़े युद्ध की दहलीज़ पर खड़ा है। रविवार देर शाम ईरान ने इज़रायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं—अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद दो महीनों में यह पहला ऐसा हमला था [A1]। इज़रायल ने सोमवार तड़के जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया [A2]। पर यह झटका सिर्फ़ ईरान तक सीमित नहीं रहा—लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ इज़रायल की ज़मीनी घुसपैठ और हवाई हमले जारी हैं। तेहरान का कहना है कि यह कार्रवाई अप्रैल के युद्धविराम का उल्लंघन है और अमेरिका के साथ कोई भी समझौता तभी संभव है जब लेबनान की लड़ाई रुके [A1][A5]।
इस तनाव के बीच वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक दरार खुलकर सामने आ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि बेरूत पर हमला न किया जाए, लेकिन इज़रायल ने फिर भी हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमला बोला [A6]। ट्रंप ने ‘फ़ाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट कहा, “मध्य पूर्व की जंग में मैं फ़ैसला करता हूँ, वो नहीं” [A4]। फिर भी नेतन्याहू ने ट्रंप की बात अनसुनी कर दी—और यह पहली बार नहीं है जब इज़रायली सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों नेताओं के बीच खुला मतभेद देखने को मिला हो [A7]।
लेबनान इस सारे विस्फोटक समीकरण का केंद्रीय धागा बन गया है। वीकेंड पर बेरूत में इज़रायली बमबारी ने हिज़्बुल्लाह को हिलाया, जिसके जवाब में ईरान को मिसाइलें छोड़नी पड़ीं [A5]। यमन और इराक़ में ईरान समर्थक प्रॉक्सी गुट पहले ही लड़ाई को चौड़ा करने की धमकी दे रहे थे। अमेरिकी मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद, यह नाज़ुक युद्धविराम अब तक के सबसे गहरे संकट में घिरता दिख रहा है [A5]।
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों नेताओं की प्राथमिकताएँ अब बिलकुल जुदा हो चुकी हैं। ट्रंप इस वर्ष होने वाले चुनावों को देखते हुए अलोकप्रिय युद्ध को समेटना चाहते हैं और होरमुज़ जलडमरूमध्य खुलवाकर पेट्रोल की क़ीमतों पर लगाम लगाना चाहते हैं [A6]। इसके उलट नेतन्याहू हिज़्बुल्लाह और ईरान के ख़िलाफ़ फ़ौरी सुरक्षा उपलब्धियाँ हासिल करने की जल्दी में हैं [A6]। हालाँकि फ़िलहाल हवाई हमलों का दौर थम गया है, पर यह बुनियादी मतभेद बने रहेंगे। लेबनान की ज़मीन अब भी उस चिनगारी की तरह है, जो कभी भी पूरे क्षेत्र को आग में झोंक सकती है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The Arab press portrays Lebanon as the central victim of escalating violence, caught between Israeli strikes and Iranian retaliation. The fragile ceasefire is on the verge of collapse, with the region bracing for full-scale war. The rift between Trump and Netanyahu is seen as a dangerous distraction from Lebanon's suffering.
Continental European press analyzes the rift between Trump and Netanyahu, highlighting how Israeli strikes in Lebanon and Iran have exposed strategic differences between the two allies. The focus is on diplomatic consequences and the risk to US-Iran talks, with a detached, analytical tone.
भारतीय और दक्षिण एशियाई मीडिया ने ट्रंप द्वारा नेतन्याहू को ईरान पर और हमले न करने की चेतावनी पर ध्यान केंद्रित किया है। खबरों में तनाव कम होने और युद्ध विराम की संभावना पर जोर दिया गया है, जिसमें एक व्यावहारिक और संयमित दृष्टिकोण अपनाया गया है।
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