कतर-ईरान गुप्त समझौते का दावा, दोहा ने वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट को बताया निराधार
वाशिंगटन पोस्ट ने आरोप लगाया कि कतर ने युद्ध के दौरान रास लफान गैस परिसर की सुरक्षा के लिए ईरान से गुप्त बातचीत की, कतर ने सिरे से खारिज कर दिया।

वाशिंगटन पोस्ट की 12 जून की रिपोर्ट ने खाड़ी क्षेत्र में हलचल मचा दी, जिसमें दावा किया गया कि कतर ने बीते युद्ध के दौरान अपने महत्वपूर्ण रास लफान गैस परिसर को ईरानी हमलों से बचाने के लिए तेहरान के साथ गुप्त बातचीत की थी। पश्चिमी और मध्य पूर्वी सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से छपी इस खबर पर कतर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'पूरी तरह निराधार' करार दिया। [A1][A5]
हारेत्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार, कतर ने कथित तौर पर ईरान को एक गुप्त प्रस्ताव दिया था—रास लफान में एकतरफा उत्पादन बंद करके वैश्विक गैस कीमतों में उछाल ला दिया जाए, जिससे अमेरिका और इज़राइल पर युद्ध को जल्द समाप्त करने का आर्थिक दबाव बने। सूत्रों का कहना है कि कतर ईरान से स्पष्ट गारंटी नहीं ले सका, लेकिन घटनाक्रम ने एक 'मौन समझ' की ओर इशारा किया। हालांकि, युद्ध के तीसरे दिन कतर द्वारा रास लफान बंद करने के बावजूद, 18 मार्च को ईरान ने इस परिसर पर मिसाइल हमला कर दिया, जिसके बाद इज़राइल ने दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर हमला बोला था। [A2] यह हमला दुनिया के कुल गैस उत्पादन के पांचवें हिस्से को प्रभावित करने वाली इस सुविधा पर हुआ, जिससे अरबों डॉलर के चीनी अनुबंध खतरे में पड़ गए। [A1][A3]
कतर ने इन आरोपों का कई भाषाओं में आधिकारिक खंडन जारी किया। सरकारी बयान में कहा गया कि 'यह सभी दावे बिल्कुल झूठे और तथ्यहीन हैं' और उस समय कतर खुद ईरानी मिसाइलों का निशाना बन रहा था। अल-मोडोन और गल्फ न्यूज़ जैसे मीडिया आउटलेट्स ने इस बात पर जोर दिया कि कतर के ऊर्जा उत्पादन से जुड़े किसी भी परिचालन निर्णय में ईरान के साथ कोई समन्वय नहीं था। [A4][A5] हमशहरी ऑनलाइन ने भी इस खंडन को प्रमुखता दी, जो तेहरान के मीडिया परिदृश्य में कतर की सफाई को दर्शाता है। [A6] कतर का कहना है कि यह रिपोर्ट झूठी सामग्री पर आधारित है और इसे युद्धविराम के कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। [A4][A5]
यह विवाद व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ को रेखांकित करता है। कतर लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन यह प्रकरण बताता है कि खाड़ी के देश किस तरह पिछले 20 वर्षों के सबसे बड़े क्षेत्रीय युद्ध के नुकसान से बचने के लिए पर्दे के पीछे कूटनीति का सहारा ले रहे हैं। [A1] हालांकि आरोपों के सच साबित न होने पर भी, इनसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और कतर की मध्यस्थ छवि पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला युद्धविराम वार्ताओं को प्रभावित करता है या कतर अपनी स्थिति को पुख्ता कर पाने में सफल रहता है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The Israeli press reports that Qatar secretly negotiated with Iran to protect its gas field, offering to halt production to pressure the US and Israel. This is framed as a betrayal, exposing Qatar's double game during the war.
The Arab press categorically denies the Washington Post report, calling it a disinformation campaign. They emphasize that Qatar's operational decisions are made independently and that the allegations are baseless, highlighting Qatar's vulnerability to Iranian attacks as evidence.
Gulf Arab outlets reject the allegations, defending Qatar's LNG shutdown as a safety measure unrelated to politics. They stress that coordination with Iran is implausible given Qatar's defensive stance, and frame the report as misleading.
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