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यूनियन बर्लिन की मैरी-लुइस ईटा: पुरुष टीम की कोच बनी पहली महिला, इतिहास रचा

मैरी-लुइस ईटा यूरोप की शीर्ष पांच लीगों में पुरुष फुटबॉल टीम की मुख्य कोच बनने वाली पहली महिला हैं। स्टेफन बाउमगार्ट की बर्खास्तगी के बाद यूनियन बर्लिन ने उन्हें सीज़न के अंत तक जिम्मेदारी सौंपी, जहाँ टीम रेलीगेशन से बचने के लिए संघर्ष कर रही है।

समाज8 स्रोत4 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 10:42

जर्मन फुटबॉल के इतिहास में 12 अप्रैल का दिन एक निर्णायक मोड़ बन गया, जब बुंडेसलीगा क्लब यूनियन बर्लिन ने 34 वर्षीय मैरी-लुइस ईटा को अंतरिम मुख्य कोच नियुक्त किया। इसके साथ ही वह यूरोप के शीर्ष पांच पुरुष लीगों में किसी टीम की कमान संभालने वाली पहली महिला बन गईं—एक ऐसी उपलब्धि जिसे इटली के इल फ़ातो कुओतिदियानो ने “युगांतकारी परिवर्तन” और फ्रांस के ल ताँ ने बुंडेसलीगा इतिहास का एक नया पन्ना करार दिया।

यह फ़ैसला हाइडेनहाइम के ख़िलाफ़ शनिवार को 3-1 की शर्मनाक हार के तुरंत बाद आया, जिसके चलते क्लब ने मुख्य कोच स्टेफन बाउमगार्ट और उनके स्टाफ़ को बर्खास्त कर दिया। हालाँकि यूनियन तालिका में 11वें स्थान पर थी, लेकिन सीईओ हॉर्स्ट हेल्ट के अनुसार टीम ने पिछले 14 लीग मैचों में सिर्फ़ दो जीत दर्ज की थीं और दूसरा हाफ़ “विनाशकारी” रहा। यह निराशाजनक लय ही बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनी, जिसकी पुष्टि इतालवी समाचार एजेंसी आंसा और ब्रिटेन के द इंडिपेंडेंट ने भी की है।

जर्मन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नज़रिये में दिलचस्प विभाजन देखने को मिलता है। जर्मन टैबलॉइड बिल्ड ने ईटा की तेज़-तर्रार कोचिंग शैली को रेखांकित किया—उसकी रिपोर्टर ने पिछले महीने यू-19 मैच के दौरान रेफ़री पर चिल्लाने और पीला कार्ड पाने का क़िस्सा सुनाया। इसके विपरीत, इतालवी और फ्रेंच आउटलेटों ने इस नियुक्ति को महिलाओं के लिए खेल की दुनिया में शीशे की छत तोड़ने वाले प्रतीकात्मक क्षण के रूप में पेश किया, जो यूरोपीय संदर्भ में इसकी व्यापक सामाजिक अहमियत को दर्शाता है।

ईटा का करियर इस ज़िम्मेदारी के लिए ठोस आधार प्रदान करता है। 2010 में टर्बाइन पॉट्सडैम के साथ महिला चैंपियंस लीग जीतने वाली ईटा इस सीज़न में यूनियन की अंडर-19 टीम की कोच थीं और अगले सत्र से क्लब की महिला टीम की मुख्य कोच बनने वाली थीं। 2023 में वह बुंडेसलीगा और यूरोप की शीर्ष लीगों में पहली सहायक कोच बनी थीं, जो इस ऐतिहासिक पदोन्नति का संकेत देता है। अब उनके सामने पाँच मैचों में रेलीगेशन से बचाने की कठिन चुनौती है—एक ऐसी परीक्षा जो न केवल उनकी तकनीकी क्षमता, बल्कि पुरुष प्रधान खेल में महिला नेतृत्व की स्वीकार्यता को भी परखेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईटा यूनियन को बचाने में सफल रहती हैं, तो यह यूरोपीय फुटबॉल में लैंगिक बाधाओं के ध्वस्त होने की दिशा में एक स्थायी मिसाल बन सकता है, न कि महज़ एक प्रतीकात्मक नियुक्ति।

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