युद्धविराम की आखिरी घड़ी: ट्रंप ने बढ़ाई समयसीमा, ईरान ने 'नए पत्तों' की दी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम एक दिन बढ़ा दिया, लेकिन तेहरान ने होर्मुज की नाकाबंदी हटने तक बातचीत से इनकार कर दिया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा पर असमंजस बरकरार।

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम बुधवार रात समाप्त होने वाला था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम समय पर इसे एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया, साथ ही साफ कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता [A29][A43]। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका यह युद्ध "बहुत बड़े अंतर से जीत रहा है" और ईरान की सैन्य क्षमता तबाह हो चुकी है [A1][A10][A11]। इस बीच, सेंट्रल कमांड ने एक हेलीकॉप्टर से मशीनगन ताने जाने का वीडियो जारी किया, जिसमें एक मालवाहक जहाज को ईरानी बंदरगाहों की ओर बढ़ने से रोका जा रहा है—यह दृश्य नाकाबंदी की कठोरता को रेखांकित करता है [A4][A15][A27]।
दूसरी ओर, ईरानी संसद अध्यक्ष और शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर क़ालीबाफ़ ने रातों-रात ट्वीट कर चेतावनी दी कि "हम धमकी के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते" और ट्रंप बातचीत की मेज़ को "समर्पण की मेज़" में बदलना चाहते हैं [A17][A22][A40]। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि तनाव बढ़ा तो ईरान "युद्ध के मैदान में नए पत्ते" खोलने को तैयार है [A40]। विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने पाकिस्तानी समकक्ष से फ़ोन पर कहा कि अमेरिका द्वारा युद्धविराम का लगातार उल्लंघन बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट है [A2]।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियों के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने की ख़बरें लगातार बदलती रहीं [A6][A9][A12]। व्हाइट हाउस ने सोमवार देर रात संकेत दिया कि दल जल्द ही रवाना होगा, लेकिन तेहरान ने अभी तक अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की [A18][A28][A39]। पाकिस्तानी सूत्रों ने विश्वास जताया कि ईरान को बातचीत की मेज़ पर लाया जा सकेगा [A33], जबकि अमेरिकी सूत्रों ने ईरानी वार्ताकारों और रिवोल्यूशनरी गार्ड के बीच गहरी आंतरिक फूट की ओर इशारा किया [A30][A31]।
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ इस संकट को अलग-अलग कोणों से देख रही हैं। यूरोपीय प्रेस, जैसे इतालवी ला स्टाम्पा, इसे "शांति नहीं, बल्कि युद्ध टालने के लिए पोकर का खेल" बता रही है [A7], जबकि जर्मन एफ़एज़ेड के अनुसार समुद्री नाकाबंदी ही बातचीत की असली बाधा है [A3]। खाड़ी देशों को चिंता है कि होर्मुज पर बातचीत का रुख ईरान की पकड़ को और मज़बूत कर सकता है [A21]। अरब मीडिया ने बताया कि तेहरान नाकाबंदी हटने को किसी भी बातचीत की शर्त बना रहा है [A16]। रूसी और चीनी स्रोतों ने ट्रंप के आत्मविश्वास और संकट की नाज़ुकता को रेखांकित किया [A13][A35]।
विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्धविराम केवल एक सशस्त्र विराम है, स्थायी शांति का रास्ता नहीं। एनज़ेड जैसे स्विस अख़बार ने टिप्पणी की कि हवाई हमले ईरानी शासन को गिरा नहीं सकते, अब कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है [A32]। भारतीय मीडिया ने ट्रंप के मिश्रित संकेतों को रेखांकित किया—वे न तो जल्दबाजी में कोई ख़राब समझौता करना चाहते हैं और न ही बमबारी की धमकी छोड़ रहे हैं [A25][A26]। नाकाबंदी से अब तक 27 जहाज़ों को वापस लौटने पर मजबूर किया जा चुका है, जबकि वैश्विक तेल व्यापार पर दबाव बढ़ता जा रहा है [A38]। ऐसे में, आने वाले घंटे तय करेंगे कि इस्लामाबाद में बातचीत की मेज़ सजती है या फिर होर्मुज के आसमान में बम गिरने लगते हैं।
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