पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका शांति समझौते के अंतिम पाठ पर सहमति की पुष्टि की, ट्रंप ने जताया संदेह
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को घोषणा की कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का अंतिम सहमति-प्राप्त पाठ तैयार हो गया है और अब अगले कदमों पर काम हो रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को एक अहम घोषणा करते हुए बताया कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच शांति समझौते का अंतिम और सर्वसम्मत पाठ तैयार कर लिया गया है। सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म एक्स पर अपने बयान में शरीफ़ ने कहा, "हम पुष्टि कर सकते हैं कि शांति समझौते के अंतिम, सहमत पाठ पर सहमति बन गई है और पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ मिलकर अगले कदमों को अंतिम रूप देने में जुटा है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समझौते को विफल करने के इरादे से लगातार दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वे पूरी तरह अवगत हैं।
इस घोषणा से कुछ घंटे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने कहा था कि अमेरिका के साथ समझौता "पहले से कहीं अधिक करीब" है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआती प्रतिक्रिया में नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि ईरान ने वार्ता को गलत तरीके से पेश किया है, लेकिन बाद में उन्होंने अराक़ची के पोस्ट को दोबारा साझा किया। जर्मन मीडिया, जैसे फ्रैंकफ़र्टर आल्गेमाइने ज़ाइटुंग ने इस घटनाक्रम को 'ईरान युद्ध लाइवब्लॉग' के तहत कवर किया और संकेत दिया कि यह समझौता एक व्यापक शांति संधि के बजाय एक रूपरेखा समझौता हो सकता है, जिसके तहत आगे की बातचीत की प्रक्रिया तय होगी।
अरब और लैटिन अमेरिकी मीडिया ने इस खबर को अलग-अलग दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया। स्काई न्यूज़ अरबिया और अल-नहर जैसे अरबी समाचार आउटलेट्स ने दुष्प्रचार अभियान के प्रति शरीफ़ की चेतावनी को प्रमुखता दी, जो क्षेत्र में मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर संवेदनशीलता को दर्शाता है। वहीं, अर्जेंटीना और ब्राज़ील के मीडिया ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका और इस समझौते के वैश्विक शांति प्रयासों में योगदान पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। सभी रिपोर्टों में इस बात पर सहमति दिखी कि यह मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक निर्णायक क्षण हो सकता है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते की विस्तृत शर्तें क्या हैं और क्या यह क्षेत्रीय युद्ध को समाप्त करने में सफल होगा, लेकिन इस घोषणा ने एक सकारात्मक संकेत दिया है। पाकिस्तान ने पिछले कई महीनों से गुप्त कूटनीति के ज़रिए दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की है, और अब अंतिम चरण में विस्तृत वार्ता और क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है, तो यह न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि व्यापक पश्चिम एशिया में स्थिरता की बहाली में भी मदद करेगा।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Iranian state-aligned outlets celebrate the announcement as a historic breakthrough, emphasizing that a final text has been agreed and peace is closer than ever. They also decry a disinformation campaign by opponents trying to sabotage the deal, framing Iran as a victim of unfair attacks.
Anglophone wire services report the development in a dry, factual tone, noting Pakistan's prime minister stated a final text has been reached and that next steps are being worked on. The report is strictly a summary of the announcement without endorsement or skepticism.
Continental European coverage highlights the Pakistani prime minister's confirmation of a deal but immediately juxtaposes it with allegations of a disinformation campaign by those seeking to sabotage the agreement. The tone is cautious, noting the fragility of the process and potential spoilers.
Gulf Arab media report the news with a positive spin, emphasizing that a final text has been agreed and that Pakistan is mediating the next steps. They also note the disinformation campaign but frame it as a minor obstacle, stressing that peace has never been closer.
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