आर्टेमिस-2 की ऐतिहासिक वापसी: चंद्रमा की परिक्रमा कर पहली बार 54 साल बाद लौटे अंतरिक्ष यात्री
प्रशांत महासागर में सफल स्प्लैशडाउन के बाद चारों यात्री ह्यूस्टन पहुंचे, जहां जोशीले स्वागत ने अमेरिका की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई उड़ान दी।

दस दिनों की ऐतिहासिक चंद्र यात्रा के बाद शुक्रवार रात प्रशांत महासागर में ओरायन कैप्सूल के उतरते ही अमेरिका ने आधी सदी का अंतरिक्ष सूखा समाप्त कर दिया। सैन डिएगो के तट से कुछ दूर, तीन विशाल पैराशूटों के सहारे यान ने लहरों पर हल्की थपकी दी, और महज दो घंटों के भीतर चारों अंतरिक्ष यात्री यूएसएस जॉन पी. मर्था के डेक पर सुरक्षित खड़े थे। [A6] यह वह क्षण था जिसका इंतज़ार अपोलो कार्यक्रम के बाद 54 वर्षों से किया जा रहा था—पहली बार मनुष्य चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरकर धरती पर लौटा। [A2]
इस सफलता की बुनियाद पहली अप्रैल को उस समय पड़ी जब 88 लाख पाउंड का जबरदस्त धक्का देते रॉकेट इंजनों ने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। [A6] दल ने अंतरिक्ष में इतनी दूरी तय की जितनी पहले कभी किसी मानव ने नहीं की—चंद्रमा के पार तक का सफ़र। [A4] बीबीसी संवाददाता के अनुसार, प्रक्षेपण के समय अंतरिक्ष यात्री सबसे शांत लोग थे, लेकिन धरती पर मौजूद पत्रकार का उत्साह वायरल हो गया। [A4] शुक्रवार रात 8:07 बजे (ईडीटी) महज 17 मील प्रति घंटे की गति से समुद्र में उतरे ओरायन ने एक त्रुटिहीन अभियान को अंजाम दिया। [A6]
शनिवार को ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में माहौल भावुक और जश्न से सराबोर था। रीड वाइज़मैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन नीले फ्लाइट सूट में जैसे ही मंच पर आए, परिवारों और सैकड़ों कर्मचारियों की तालियों ने हवा को गूंजा दिया। [A2] नासा प्रशासक जेयर्ड आइज़कमैन ने कहा, "वेलकम होम, आर्टेमिस," और कमांडर वाइज़मैन ने साथियों की ओर इशारा करते हुए कहा, "विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी—हम हमेशा के लिए बंधे हैं, नीचे कोई नहीं जानेगा कि हम चारों ने क्या अनुभव किया।" [A8] यह भावनात्मक संबोधन मिशन की गहराई और आपसी विश्वास को रेखांकित करता है।
इस ऐतिहासिक स्प्लैशडाउन ने देशभर के खेल स्टेडियमों में जंबोट्रॉन पर रोमांच भर दिया। न्यूयॉर्क मेट्स से लेकर नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी तक, कोच की वापसी पर वॉल्फ पैक इमोजी के साथ जयकारा गूंजा। [A9] यह दृश्य बताता है कि नासा का यह अभियान केवल वैज्ञानिक नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक क्षण बन गया।
आर्टेमिस-2 के सकुशल समापन ने भविष्य की चंद्र सतह उतरने की योजनाओं के लिए ठोस आधार तैयार कर दिया है। एक दशक के अथक अभ्यास और परीक्षणों के बाद हासिल यह उपलब्धि चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति के सपने को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक छलांग है। [A6] जैसे-जैसे तकनीकी बाधाएं दूर हो रही हैं, गहरे अंतरिक्ष में बस्तियां बसाने की संभावना पहले से कहीं अधिक वास्तविक लगती है।
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