चीन ने ‘जासूस कछुओं’ और ‘मछलियों’ के ज़रिए समुद्री डेटा चोरी का आरोप लगाया
चीनी खुफिया एजेंसी ने आरोप लगाया कि विदेशी ताकतें सेंसर-लगे समुद्री जीवों, ड्रोन और बोया से सैन्य-स्तरीय जानकारी जुटा रही हैं, जिसे ‘अदृश्य गुप्त युद्ध’ बताया गया।

चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय ने हाल ही में एक विवादास्पद दावा किया है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां समुद्री जासूसी के नए तरीके अपना रही हैं, जिनमें कछुए और मछलियों जैसे समुद्री जीवों पर सेंसर लगाकर संवेदनशील आंकड़े जुटाना शामिल है। वीचैट पर जारी एक बयान में मंत्रालय ने इसे “अदृश्य गुप्त युद्ध” करार दिया। इसमें बताया गया कि चीन के कुछ जलक्षेत्रों में अपेक्षाकृत बड़े समुद्री जीव पाए गए, जिन पर सेंसर लगे थे और वे पानी के तापमान, लवणता और समुद्री धाराओं जैसी सूचनाएं रीयल टाइम में एकत्र कर विदेशों में भेज रहे थे।
यह आरोप कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले सप्ताह ही चीन ने ताइवान के दक्षिण-पूर्व में जापानी टोही विमानों की मौजूदगी की खबर दी थी, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। अब मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन और पश्चिमी देशों के बीच समुद्री सीमाओं पर प्रभुत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा तीव्र है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस पर अलग-अलग ढंग से प्रतिक्रिया दी। पश्चिमी प्रेस, जैसे द गार्जियन ने इसे चीन की बढ़ती शंकाओं का परिचायक बताया, जबकि इतालवी अखबार इल जियोर्नेल ने ‘जासूसी कछुओं’ को लेकर चीन की चिंता पर ज़ोर दिया। रूसी वेदोमोस्ती ने तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें इन उपकरणों की डेटा संचारण क्षमता का उल्लेख हुआ।
चीनी बयान के अनुसार, सिर्फ जीवित प्राणी ही नहीं, बल्कि उच्च-सटीकता वाले ध्वनिक सेंसर से सुसज्जित बोया और स्वायत्त अंडरवाटर ड्रोन भी पाए गए हैं, जो पनडुब्बी बुनियादी ढांचे का नक्शा तैयार करने में सक्षम हैं। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यह गतिविधियाँ चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘गंभीर खतरा’ पैदा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य निगरानी के लिए समुद्री जीवों का उपयोग नया नहीं है, लेकिन चीन का इसे इस तरह उजागर करना संकेत देता है कि वह अपनी समुद्री रक्षा क्षमताओं में सुधार के लिए जनमत और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना चाहता है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। चीन संभवतः इस कार्रवाई का उपयोग दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करेगा, जबकि पश्चिमी राष्ट्र इसे प्रचार अभियान के रूप में देख सकते हैं। इन आरोपों की सत्यता भले ही सिद्ध न हो, पर यह निर्विवाद है कि आधुनिक संघर्ष का क्षेत्र आसमान से बढ़कर अब समुद्र की गहराइयों तक पहुँच गया है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
चीन का सुरक्षा मंत्रालय चेतावनी देता है कि विदेशी एजेंसियाँ संवेदनशील समुद्री डेटा चुराने के लिए सेंसर लगे कछुओं और मछलियों का उपयोग कर रही हैं। सोशल मीडिया अलर्ट एक अदृश्य पानी के नीचे युद्ध और गंभीर खतरे की बात करता है। ताइवान के पास कथित जापानी जासूसी उड़ानों को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है।
चीन के सुरक्षा मंत्रालय ने जासूसी सेंसर वाले कछुओं और मछलियों की खोज की घोषणा की, और दावा किया कि विदेशी खुफिया एजेंसियाँ समुद्र में एक अदृश्य गुप्त युद्ध लड़ रही हैं। इस दावे को एक निश्चित दूरी के साथ रिपोर्ट किया गया, जो समुद्री जानवरों से उत्पन्न खतरे पर संदेह का संकेत देता है।
चीन ने जासूसी कछुओं और मछलियों को लेकर अलार्म बजाया है, जिनका उपयोग विदेशी एजेंसियाँ समुद्री जानकारी चुराने के लिए कर रही हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में सुरक्षा मंत्रालय ने एक अदृश्य गुप्त युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की बात कही।
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