AI बूम से चीन का निर्यात 19.4% बढ़ा, 295 अरब डॉलर की डेटा सेंटर योजना तैयार
वैश्विक एआई निवेश की लहर ने चीन के उच्च-तकनीक निर्यात को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया, जबकि बीजिंग ने पांच साल में 295 अरब डॉलर के डेटा सेंटर नेटवर्क की योजना बनाई है।

चीन के निर्यात ने मई में वार्षिक आधार पर 19.4% की छलांग लगाई, जो अर्थशास्त्रियों के 15% के अनुमान को पीछे छोड़ते हुए 376.78 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा प्रोसेसिंग उपकरणों जैसे उच्च-तकनीक उत्पादों की वैश्विक मांग से प्रेरित था, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेज़ होते निवेश का सीधा परिणाम है। मई में चीन का व्यापार अधिशेष 105.43 अरब डॉलर रहा, जो बताता है कि ईरान संघर्ष से उपजी ऊर्जा कीमतों की मार के बावजूद अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। हालाँकि, इसके साथ ही ऐसे संकेत भी मिले हैं कि ऊँची ऊर्जा लागतों के कारण पहले से जमा माल का स्टॉक घटने लगा है और विदेशी खरीदार संघर्ष विराम की उम्मीद में इन्वेंट्री कम कर रहे हैं।
इस बीच, बीजिंग एआई में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए एक बृहद योजना पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग की अगुवाई में करीब 2 ट्रिलियन युआन (295 अरब डॉलर) का निवेश अगले पाँच वर्षों में देशव्यापी इंटरकनेक्टेड डेटा केंद्रों का जाल बिछाने में लगेगा। इस रणनीति की बुनियाद में चाइना मोबाइल और चाइना टेलीकॉम जैसे सरकारी दिग्गजों की केंद्रीय भूमिका होगी और हुआवेई जैसे घरेलू चिप आपूर्तिकर्ताओं को वरीयता दी जाएगी। यह केवल व्यय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एआई को स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और उद्योग में उतारने के लिए कंप्यूटिंग पॉवर, संचार नेटवर्क और विद्युत ग्रिड को एकसाथ जोड़ने की रणनीतिक परिकल्पना है।
इस डिजिटल बुनियादी ढाँचे को ऊर्जा देने के लिए चीन परमाणु क्षमता में अभूतपूर्व गति से विस्तार कर रहा है। गेवाकल टेक्नोलॉजीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में निर्माणाधीन लगभग आधे रिएक्टर फिलहाल चीन में हैं और 2030 तक उसकी स्थापित क्षमता 110 गीगावॉट तक पहुँच सकती है। विश्लेषक मानते हैं कि 2035 तक चीन दुनिया का सबसे गतिशील और प्रभावशाली परमाणु उद्योग बन जाएगा। साथ ही, राष्ट्रीय डेटा प्रशासन ने एआई मॉडलों के प्रशिक्षण के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा की आपूर्ति बढ़ाने का एक व्यापक मसौदा जारी किया है, ताकि वैश्विक डेटा संकट के बीच चीन अपनी ‘एआई प्लस’ औद्योगिक रणनीति को निर्बाध गति दे सके।
व्यापार के मोर्चे पर रूस जैसे ब्रिक्स साझेदारों के साथ चीन का आदान-प्रदान भी तेज़ी से बढ़ा है—पहले पाँच महीनों में द्विपक्षीय व्यापार में 23% की वृद्धि हुई—जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बीजिंग के विविधतापूर्ण आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। निर्यात में रिकॉर्ड तेज़ी, बुनियादी ढाँचे पर भारी निवेश और ऊर्जा तथा डेटा आपूर्ति की दीर्घकालिक योजनाएँ यह संकेत देती हैं कि चीन एआई के क्षेत्र में अमेरिका को कड़ी टक्कर देने के लिए हर स्तर पर तैयारी कर रहा है। मध्य-पूर्व की अस्थिरता और ऊर्जा कीमतों का दबाव भले ही बना रहे, पर चीन की एआई-संचालित विकास रणनीति उसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के केंद्र में और गहराई तक स्थापित कर सकती है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
चीन 295 अरब डॉलर की योजना के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता में तेजी ला रहा है, जबकि यूरोप अंतिम ट्रेन खोने का जोखिम उठा रहा है। चीनी निर्यात वैश्विक अस्थिरता को चुनौती देते हुए मई में 19.4% बढ़ा, हाई-टेक मांग के कारण। बीजिंग एआई को औद्योगिक नीति का लीवर बना रहा है, डिजिटल भविष्य की बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है।
एआई की मांग से प्रेरित, चीन अमेरिका को पीछे छोड़कर शीर्ष परमाणु ऊर्जा उत्पादक बनने की राह पर है, अद्वितीय गति से रिएक्टर बना रहा है। बीजिंग एक राष्ट्रव्यापी योजना के साथ एआई डेटा आपूर्ति भी बढ़ा रहा है, जबकि दुनिया डेटा की कमी का सामना कर रही है। एआई प्लस रणनीति का लक्ष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अर्थव्यवस्था के औद्योगिक ढांचे में बुनना है।
रूस के साझेदार चीन ने विदेशी व्यापार में तेजी से वृद्धि की, 2026 के पहले पांच महीनों में 15.3% की वृद्धि हुई। इसी अवधि में रूस और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 23% बढ़ा। ब्रिक्स देश आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, चीनी निर्यात में उछाल और आयात में 21.5% की वृद्धि हुई है।
यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ
9 स्रोत · 5 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की